घोटे घोट घुमाए दे प्यारी रगडा खूब लगाये दे
पिल्वायदे भंगिया घोट ओ गनपत की मम्मी
दुरक लगी भंगिया की तगडी तने नही इब तक रगड़ी
बुज्वाये दे मन की प्यास ओ गनपत की मम्मी
पिल्वायदे भंगिया घोट
भूतो की फ़ौज से आने वाली फेर नही सब जाने वाली
कर जल्दी हो मत लेट ओ गनपत की मम्मी
पिल्वायदे भंगिया घोट
केलाश पे न मुझको जाना भंगियाँ कना हो न पीना खाना
मैं करता रहूँगा वेट ओ गनपत की मम्मी
पिल्वायदे भंगिया घोट

मैं एक पत्नी होने के साथ साथ गृहिणी एवं माँ भी हुँ । लिखने का हुनर... ब्लॉग लिखती रहती हु... सनातन ग्रुप एक सकारात्मक ऊर्जा, आत्मनिर्भर बनाने की प्रेरणा देती जीवनी, राष्ट्रभक्ति गीत एवं कविताओं की माला पिरोया है । आग्रह :आपको पसन्द आये तो ऊर्जा देने के लिए शेयर एवं अपने सुझाव दीजिए ।

शालू सिंह

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