श्री बृहस्पति स्तोत्रम् || Brihaspati Stotram
विनियोग –

ॐ अस्य श्रीबृहस्पति स्तोत्रस्य गृत्समद् ऋषिः, अनुष्टुप छन्दः,

बहस्पतिः देवता, श्रीबृहस्पति प्रीत्यर्थे पाठे विनियोगः।।

गुरुर्बुहस्पतिर्जीवः सुराचार्यो विदांवरः।

वागीशो धिषणो दीर्घश्मश्रुः पीताम्बरो युवा।।

सुधादृष्टिः ग्रहाधीशो ग्रहपीडापहारकः।

दयाकरः सौम्य मूर्तिः सुराज़: कुङ्कमद्युतिः।।

लोकपूज्यो लोकगुरुर्नीतिज्ञो नीतिकारकः।

तारापतिश्चअङ्गिरसो वेद वैद्य पितामहः।।

भक्तया वृहस्पतिस्मृत्वा नामानि एतानि यः पठेत्।

आरोगी बलवान् श्रीमान् पुत्रवान् स भवेन्नरः।।

जीवेद् वर्षशतं मर्त्यः पापं नश्यति तत्क्षणात्।

यः पूजयेद् गुरु दिने पीतगन्धा अक्षताम्बरैः।

पुष्पदीपोपहारैश्च पूजयित्वा बृहस्पतिम्।

ब्राह्मणान् भोजयित्वा च पीडा शान्ति:भवेद्गुरोः।।

मैं एक पत्नी होने के साथ साथ गृहिणी एवं माँ भी हुँ । लिखने का हुनर... ब्लॉग लिखती रहती हु... सनातन ग्रुप एक सकारात्मक ऊर्जा, आत्मनिर्भर बनाने की प्रेरणा देती जीवनी, राष्ट्रभक्ति गीत एवं कविताओं की माला पिरोया है । आग्रह :आपको पसन्द आये तो ऊर्जा देने के लिए शेयर एवं अपने सुझाव दीजिए ।

शालू सिंह

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