शिव पुराण संहिता में कहा है कि सर्वज्ञ शिव ने संपूर्ण देहधारियों के सारे मनोरथों की सिद्धि के लिए इस ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का प्रतिपादन किया है। यह आदि षड़क्षर मंत्र संपूर्ण विद्याओं का बीज है। जैसे वट बीज में महान वृक्ष छिपा हुआ है, उसी प्रकार अत्यंत सूक्ष्म होने पर भी यह मंत्र महान अर्थ से परिपूर्ण है।

ॐ इस एकाक्षर मंत्र में तीनों गुणों से अतीत, सर्वज्ञ, सर्वकर्ता, द्युतिमान सर्वव्यापी प्रभु शिव ही प्रतिष्ठित हैं। ईशान आदि जो सूक्ष्म एकाक्ष रूप ब्रह्म हैं, वे सब ‘नमः शिवाय’ इस मंत्र में क्रमशः स्थित हैं।

शिव षडक्षर स्तोत्र मूल पाठ

श्रीशिवषडक्षरस्तोत्रम्

ॐकारं बिंदुसंयुक्तं नित्यं ध्यायंति योगिनः ।

कामदं मोक्षदं चैव ॐकाराय नमो नमः ॥ १॥

नमंति ऋषयो देवा नमन्त्यप्सरसां गणाः ।

नरा नमंति देवेशं नकाराय नमो नमः ॥ २॥

महादेवं महात्मानं महाध्यानं परायणम् ।

महापापहरं देवं मकाराय नमो नमः ॥ ३॥

शिवं शांतं जगन्नाथं लोकानुग्रहकारकम् ।

शिवमेकपदं नित्यं शिकाराय नमो नमः ॥ ४॥

वाहनं वृषभो यस्य वासुकिः कंठभूषणम् ।

वामे शक्तिधरं देवं वकाराय नमो नमः ॥ ५॥

यत्र यत्र स्थितो देवः सर्वव्यापी महेश्वरः ।

यो गुरुः सर्वदेवानां यकाराय नमो नमः ॥ ६॥

षडक्षरमिदं स्तोत्रं यः पठेच्छिवसंनिधौ ।

शिवलोकमवाप्नोति शिवेन सह मोदते ॥ ७॥

॥ इति श्री रुद्रयामले उमामहेश्वरसंवादे षडक्षरस्तोत्रं सम्पूर्णम् ॥

शिव षडक्षर स्तोत्र (हिंदी अर्थ सहित)

श्रीशिवषडक्षरस्तोत्रम्

ॐ कारं बिंदुसंयुक्तं नित्यं ध्यायंति योगिन:।

कामदं मोक्षदं चैव ॐ काराय नमो नमः।।१।।

जो ॐकार के रूप में आध्यात्मिक ह्रदय केन्द्र में रहते है, जिसका योगी निरंतर ध्यान करते है, जो सभी इच्छाओं को पूरा करते है और मुक्ति भी प्रदान करते है, उन शिवजी को नमस्कार ,जो “ॐ” शब्द द्वारा दर्शाया गया है।१।

नमंति ऋषयो देवा नमन्त्यप्सरसां गणा:।

नरा नमंति देवेशं नकाराय नमो नमः।।२।।

जिनको ऋषियों ने श्रद्धा से नमन किया है, देवों ने नमन किया है, अप्सराओं ने नमन किया है और मनुष्यों ने नमन किया है, वो देवों के देव महादेव है, उनको “न” शब्द द्वारा दर्शाया गया है।२।

महादेवं महात्मानं महाध्याय परायणम्।

महापापहरं देवं मकाराय नमो नमः।।३।।

जो महान देव है, महान आत्मा है, सभी ध्यान का अंतिम उद्देश्य है, जो अपने भक्तों के पाप का महा विनाशक है, उन शिवजी को नमस्कार ,जो “म” शब्द द्वारा दर्शाया गया है।३।

शिवं शांतं जगन्नाथं लोकानुग्रहकारकम्।

शिवमेकपदं नित्यं शिकाराय नमो नमः।।४।।

शिवजी शांति का निवास है, जो जगत के स्वामी है और जगत का कल्याण करते है, शिव एक शाश्वत शब्द है, उन शिवजी को नमस्कार ,जो “शि” शब्द द्वारा दर्शाया गया है।४।

वाहनं वृषभो यस्य वासुकि कंठभूषणम्।

वामे शक्तिधरं देवं वकाराय नमो नमः।।५।।

जिनका वाहन बैल है, जिनके गले में आभूषण के रूप में वासुकि नामक सांप है, जिनके बाई ओर साक्षात शक्ति बिराजमान है, उन शिवजी को नमस्कार ,जो “व”, “वा” शब्द द्वारा दर्शाया गया है।५।

यत्र यत्र स्थितो देव: सर्वव्यापी महेश्वर:।

यो गुरु: सर्वदेवानां यकाराय नमो नमः।।६।।

जहां भी देवों का निवास है, शिवजी हर जगह मौजूद है, वो सभी देवों के गुरु है, उन शिवजी को नमस्कार ,जो “य” शब्द द्वारा दर्शाया गया है।६।

षडक्षरमिदं स्तोत्र य: पठेच्छिवसंनिधौ।

शिवलोकमवाप्नोति शिवेन सह मोदते।।७।।

जो भी शिवजी के सानिध्य में, इस षडक्षर स्तोत्र का पठन करता है,वो शिव लोक में जाकर, उनके साथ आनंद से निवास करता है।७।

॥ इति श्री रुद्रयामले उमामहेश्वरसंवादे शिव षडक्षर स्तोत्र सम्पूर्णम् ॥

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शालू सिंह

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