दुर्वारदुर्विषहदुःखशताभिघातै- र्दूरार्दितस्य भगवन्, मनसो गतिस्त्वम्।

दिष्ट्याद्य दिव्यकरुणावरुणालयं तं त्वां सत्यसायिभगवन्, शरणं प्रपद्ये॥१॥

मन्दस्मितातिरमणीयमुखारविन्दं कारुण्यवर्षकमनीयकटाक्षपातम्।

शान्तिप्रदं भृशमशान्तहृदन्तराणां त्वां सत्यसायिभगवन्, शरणं प्रपद्ये॥२॥

भूयासमुत्सुकमतिर्भगवत्पदाब्ज- सेवासु भागवतसङ्कथनोत्सवेषु।

न स्यां दुरन्ततरभौतिकसौख्यमग्न- स्त्वां सत्यसायिभगवन्, शरणं प्रपद्ये॥३॥

नित्यं स्वधर्मवशकर्ममयप्रसूनै- रत्यन्तपावनतरैः परिपूज्य च त्वाम्।

सत्यां प्रशान्तिमुपगच्छतु जीवितं मे त्वां सत्यसायिभगवन्, शरणं प्रपद्ये॥४॥

दिव्यानुभाव, दयया शिशिरीकुरुष्व दीनं भवच्चरणदासममुं महात्मन्।

त्वद्दर्शनामृतकणास्वादनैकतृप्त- स्त्वां सत्यसायिभगवन्, शरणं प्रपद्ये॥५॥

मैं एक पत्नी होने के साथ साथ गृहिणी एवं माँ भी हुँ । लिखने का हुनर... ब्लॉग लिखती रहती हु... सनातन ग्रुप एक सकारात्मक ऊर्जा, आत्मनिर्भर बनाने की प्रेरणा देती जीवनी, राष्ट्रभक्ति गीत एवं कविताओं की माला पिरोया है । आग्रह :आपको पसन्द आये तो ऊर्जा देने के लिए शेयर एवं अपने सुझाव दीजिए ।

शालू सिंह

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