अनगिन जीवन धारा मिलकर
इस धरती पर आई।
गंगा यमुना के जल -सी है
भेद-अभेद समाई॥ध्रु०॥

यह धरती है अतीव पावन
गंगा में कण-कण गंगा बन।
खोकर सारा ही अपनापन
ऋध्दि-सिध्दि-निधि सब पाई॥१॥अनगिन

आगे बढ़ना धर्म हमारा
लेकर वैभव पूर्ण पसारा
किन्तु अटल यह रहे किनारा
शिव सेवा हित धाई॥२॥

जन मन रंजन पल पल करना
तन-मन का सब आतप हरना।
शाखा उप-शाखा में बहना
धरती प्यास बुझाई॥३॥

सागर की लहरें तूफानी
शीश हिमालय का अभिमानी।
गगन हिलाते आँधी-पानी
सबको साथ मिलाई॥४॥

anagina jīvana dhārā milakara
isa dharatī para āī |
gaṁgā yamunā ke jala -sī hai
bheda-abheda samāī ||dhru0||

yaha dharatī hai atīva pāvana
gaṁgā meṁ kaṇa-kaṇa gaṁgā bana |
khokara sārā hī apanāpana
ṛadhdi-sidhdi-nidhi saba pāī ||1|’nagina

āge baṛhanā dharma hamārā
lekara vaibhava pūrṇa pasārā
kintu aṭala yaha rahe kinārā
śiva sevā hita dhāī ||2||

jana mana raṁjana pala pala karanā
tana-mana kā saba ātapa haranā |
śākhā upa-śākhā meṁ bahanā
dharatī pyāsa bujhāī ||3||

sāgara kī lahareṁ tūphānī
śīśa himālaya kā abhimānī |
gagana hilāte ādhī-pānī
sabako sātha milāī ||4||

, , , , , , , , , , , ,

मैं एक पत्नी होने के साथ साथ गृहिणी एवं माँ भी हुँ । लिखने का हुनर... ब्लॉग लिखती रहती हु... सनातन ग्रुप एक सकारात्मक ऊर्जा, आत्मनिर्भर बनाने की प्रेरणा देती जीवनी, राष्ट्रभक्ति गीत एवं कविताओं की माला पिरोया है । आग्रह :आपको पसन्द आये तो ऊर्जा देने के लिए शेयर एवं अपने सुझाव दीजिए ।

शालू सिंह

🙏 सकारात्मक जानकारी को फेसबुक पर पाने के लिए लाइक करें 👇

Leave a Reply