बढ़े चलो बढ़े चलो

न हाथ एक अस्त्र हो
न साथ एक अस्त्र हो
न अन्न नीर वस्त्र हो
हटो नहीं डटो वहीं बढ़े चलो बढ़े चलो॥१॥

रहे समक्ष हिमशिखर
तुम्हारा पग उठे निखर
भले ही जाय तन बिखर
रुक नहीं झुको नहीं बढ़े चलो बढ़े चलो ॥२॥

घटा घिरी अटूट हो
अधर में कालकूट हो
वही अमृत का घूँट हो
जिये चलो मरे चलो बढ़े चलो बढ़े चलो॥३॥

गगन उगलता आग हो
छिड़ा मरण का राग हो
लहू का अपने फाग हो
अड़ो वहीं गड़ो वहीं बढ़े चलो बढ़े चलो॥४॥

चलो नयी मिसाल हो
चलो यही मशाल हो
बढ़ो नया कमाल हो
रुको नहीं झुको नहीं बढ़े चलो बढ़े चलो॥५॥

baṛhe calo baṛhe calo

na hātha eka astra ho
na sātha eka astra ho
na anna nīra vastra ho
haṭo nahīṁ ḍaṭo vahīṁ baṛhe calo baṛhe calo ||1||

rahe samakṣa himaśikhara
tumhārā paga uṭhe nikhara
bhale hī jāya tana bikhara
ruka nahīṁ jhuko nahīṁ baṛhe calo baṛhe calo ||2||

ghaṭā ghirī aṭūṭa ho
adhara meṁ kālakūṭa ho
vahī amṛta kā ghūṭa ho
jiye calo mare calo baṛhe calo baṛhe calo ||3||

gagana ugalatā āga ho
chiṛā maraṇa kā rāga ho
lahū kā apane phāga ho
aṛo vahīṁ gaṛo vahīṁ baṛhe calo baṛhe calo ||4||

calo nayī misāla ho
calo yahī maśāla ho
baṛho nayā kamāla ho
ruko nahīṁ jhuko nahīṁ baṛhe calo baṛhe calo ||5||

, , , , , , , , , , , ,

मैं एक पत्नी होने के साथ साथ गृहिणी एवं माँ भी हुँ । लिखने का हुनर... ब्लॉग लिखती रहती हु... सनातन ग्रुप एक सकारात्मक ऊर्जा, आत्मनिर्भर बनाने की प्रेरणा देती जीवनी, राष्ट्रभक्ति गीत एवं कविताओं की माला पिरोया है । आग्रह :आपको पसन्द आये तो ऊर्जा देने के लिए शेयर एवं अपने सुझाव दीजिए ।

शालू सिंह

🙏 सकारात्मक जानकारी को फेसबुक पर पाने के लिए लाइक करें 👇

Leave a Reply