भारती जय-विजय करे
कनक शस्य कमल धरे
भारती जय०।
लंका पदतल शतदल
गर्जितोर्मि सागर जल
धोता शुचि चरणयुगल
स्तव कर बहु अर्थ भरे
भारती जय ०॥
तरु तृण बन लता वसन
अंतर में खचित सुमन
गंगा ज्योतिरोज्ज्वल कण
धवल-धार हार गले
भारती जय ०॥
मुकुट शुभ्र हिम तुषार
प्राण प्रणव ॐकार
ध्वनित दिशाएँ उदार
शतमुख शत रव बिखरे
भारती जय ०॥
bhāratī jaya-vijaya kare
kanaka śasya kamala dhare
bhāratī jaya0|
laṁkā padatala śatadala
garjitormi sāgara jala
dhotā śuci caraṇayugala
stava kara bahu artha bhare
bhāratī jaya 0||
taru tṛṇa bana latā vasana
aṁtara meṁ khacita sumana
gaṁgā jyotirojjvala kaṇa
dhavala-dhāra hāra gale
bhāratī jaya 0||
mukuṭa śubhra hima tuṣāra
prāṇa praṇava omkāra
dhvanita diśāe udāra
śatamukha śata rava bikhare
bhāratī jaya 0||
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मैं एक पत्नी होने के साथ साथ गृहिणी एवं माँ भी हुँ । लिखने का हुनर... ब्लॉग लिखती रहती हु... सनातन ग्रुप एक सकारात्मक ऊर्जा, आत्मनिर्भर बनाने की प्रेरणा देती जीवनी, राष्ट्रभक्ति गीत एवं कविताओं की माला पिरोया है । आग्रह :आपको पसन्द आये तो ऊर्जा देने के लिए शेयर एवं अपने सुझाव दीजिए ।

शालू सिंह

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