दर्शन मिला जबसे जिनवर का,
मन मंदिर में खुशियां छाई है,
एक पल भी कभी न भूलू न तुम्हे,
ये आवाज़ दिल से आई है,
दर्शन मिला जबसे जिनवर का।।

तर्ज – घूँघट की आड़ से।

रूप जिनवर का कितना मनोहर है,
त्याग करूणा का ये तो सरोवर है,
सारे जग में नहीं तुमसा दूजा है,
मेरे मन से प्रभु तेरी पूजा है…
शरण में जो आ गया,
वो पार भव से हो गया…
मुझको भी तुम जैसा बनना है,
ये हसरत तेरे दर पे लाई है….
एक पल भी कभी न भूलू न तुम्हे,
ये आवाज़ दिल से आई है,
दर्शन मिला जबसे जिनवर का।।

आजतक मेने सच को न जाना था,
में तो भोगो के पीछे दीवाना था,
सुख की घड़ियों में जो मे्रे साथी है,
छोड़ देंगे जिन्हें अपना माना था,
कर्म जो किये,रहेंगे अंत में साथी मेरे….
जिनवर की वाणी को सुनने से,
ये बात समझ मे आयी है….
एक पल भी कभी न भूलू न तुम्हे,
ये आवाज़ दिल से आई है,
दर्शन मिला जबसे जिनवर का।।

दर्शन मिला जबसे जिनवर का,
मन मंदिर में खुशियां छाई है,
एक पल भी कभी न भूलू न तुम्हे,
ये आवाज़ दिल से आई है,
दर्शन मिला जबसे जिनवर का।।

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मैं एक पत्नी होने के साथ साथ गृहिणी एवं माँ भी हुँ । लिखने का हुनर... ब्लॉग लिखती रहती हु... सनातन ग्रुप एक सकारात्मक ऊर्जा, आत्मनिर्भर बनाने की प्रेरणा देती जीवनी, राष्ट्रभक्ति गीत एवं कविताओं की माला पिरोया है । आग्रह :आपको पसन्द आये तो ऊर्जा देने के लिए शेयर एवं अपने सुझाव दीजिए ।

शालू सिंह

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