देश का युग का तुम्ही पर ध्यान।
देश का युग का तुम्हीं पर ध्यान है।
हिन्दु तेरे तेज का आह्वान है॥ध्रु॥

वंदना करता सतत् इतिहास है
संगठन में ही विजय -विश्वास है।
अटल दृढ़ता क्रांति का उल्लास है
मृत्यु में नव सृजन का मधुमास है।
चपल चरणों में भरा उत्थान है॥१॥

पर्वत पर चढ़ चल तू धर्म ले
जाह्नवी लाया भगीरथ -कर्म ले।
चक्रव्यूहों को सदा है तोड़ता
प्राण में अभिमन्यु साहस मर्म ले।
देश का कण-कण सुनाता गान है॥२॥

आज संकट की घड़ी ललकारती
त्रस्त फिर है आज भारत भारती।
स्वार्थ -परता ग्रस्त शासन अन्ध है
द्रौपदी रोती खड़ी मन हारती।
चीर खींचे जा रहा अभिमान है॥३॥

छोड़ कर उठ व्यक्ति -वादी कल्पना
तोड़ कर उठ संकुचित दल -भावना।
राष्ट्र के व्यापक महा विस्तार में
जोड़ दें निज व्यष्टि की तप साधना
मोह रजनी का हुआ अवसान है॥४॥

deśa kā yuga kā tumhī para dhyāna |
deśa kā yuga kā tumhīṁ para dhyāna hai |
hindu tere teja kā āhvāna hai ||dhru||

vaṁdanā karatā satat itihāsa hai
saṁgaṭhana meṁ hī vijaya -viśvāsa hai |
aṭala dṛṛhatā krāṁti kā ullāsa hai
mṛtyu meṁ nava sṛjana kā madhumāsa hai |
capala caraṇoṁ meṁ bharā utthāna hai ||1||

parvata para caṛha cala tū dharma le
jāhnavī lāyā bhagīratha -karma le |
cakravyūhoṁ ko sadā hai toṛatā
prāṇa meṁ abhimanyu sāhasa marma le |
deśa kā kaṇa-kaṇa sunātā gāna hai ||2||

āja saṁkaṭa kī ghaṛī lalakāratī
trasta phira hai āja bhārata bhāratī |
svārtha -paratā grasta śāsana andha hai
draupadī rotī khaṛī mana hāratī |
cīra khīṁce jā rahā abhimāna hai ||3||

choṛa kara uṭha vyakti -vādī kalpanā
toṛa kara uṭha saṁkucita dala -bhāvanā |
rāṣṭra ke vyāpaka mahā vistāra meṁ
joṛa deṁ nija vyaṣṭi kī tapa sādhanā
moha rajanī kā huā avasāna hai ||4||

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मैं एक पत्नी होने के साथ साथ गृहिणी एवं माँ भी हुँ । लिखने का हुनर... ब्लॉग लिखती रहती हु... सनातन ग्रुप एक सकारात्मक ऊर्जा, आत्मनिर्भर बनाने की प्रेरणा देती जीवनी, राष्ट्रभक्ति गीत एवं कविताओं की माला पिरोया है । आग्रह :आपको पसन्द आये तो ऊर्जा देने के लिए शेयर एवं अपने सुझाव दीजिए ।

शालू सिंह

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