ध्येय ने बलिदान के पथ पर पुकारा।
तोड़नी है हमें अन्तिम मोह कारा॥

सूर्य संस्कृति का गहन तम में ढका है
स्रोत जीवन का थका उलझा रुका है
अभी माँ के केश रुखे अधर सूखे
दृग सजल हैं कोटि उसके पुत्र भूखे
इस गहनतम में बने हम ही सहारा॥१॥

हुआ लांछित पुनः आज स्वदेश अपना
विगत सीमा प्रांत पौरुष तेज अपना
लाज से हिमगिरि ने अब निज सिर उछाला
उदधि भी उठ-उठ न अब जयगान गाता
है बहानी आज रिपु की रक्त धारा॥२॥

राम का हम आज धर्म महान भूले
कृष्ण का भी हाय गीता-ज्ञान भूले
विस्मृता चाणक्य की जय की कथा है
क्यों न उर में जागती फिर भी व्यथा है
गर्जना से आज हिलता गगन सारा॥३॥

है कहाँ अब चन्द्रगुप्त महान विक्रम
भर रहा सब ओर अति अवसाद विभ्रम
उठो हे चित्तौड़ पुण्य प्रताप जागो
हे शिवा हे केसरी आलस्य त्यागो
आज पुनः समर्थ ने हमको पुकारा॥४॥

dhyeya ne balidāna ke patha para pukārā |
toṛanī hai hameṁ antima moha kārā ||

sūrya saṁskṛti kā gahana tama meṁ ḍhakā hai
srota jīvana kā thakā ulajhā rukā hai
abhī mā ke keśa rukhe adhara sūkhe
dṛga sajala haiṁ koṭi usake putra bhūkhe
isa gahanatama meṁ bane hama hī sahārā ||1||

huā lāṁchita punaḥ āja svadeśa apanā
vigata sīmā prāṁta pauruṣa teja apanā
lāja se himagiri ne aba nija sira uchālā
udadhi bhī uṭha-uṭha na aba jayagāna gātā
hai bahānī āja ripu kī rakta dhārā ||2||

rāma kā hama āja dharma mahāna bhūle
kṛṣṇa kā bhī hāya gītā-jñāna bhūle
vismṛtā cāṇakya kī jaya kī kathā hai
kyoṁ na ura meṁ jāgatī phira bhī vyathā hai
garjanā se āja hilatā gagana sārā ||3||

hai kahā aba candragupta mahāna vikrama
bhara rahā saba ora ati avasāda vibhrama
uṭho he cittauṛa puṇya pratāpa jāgo
he śivā he kesarī ālasya tyāgo
āja punaḥ samartha ne hamako pukārā ||4||

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मैं एक पत्नी होने के साथ साथ गृहिणी एवं माँ भी हुँ । लिखने का हुनर... ब्लॉग लिखती रहती हु... सनातन ग्रुप एक सकारात्मक ऊर्जा, आत्मनिर्भर बनाने की प्रेरणा देती जीवनी, राष्ट्रभक्ति गीत एवं कविताओं की माला पिरोया है । आग्रह :आपको पसन्द आये तो ऊर्जा देने के लिए शेयर एवं अपने सुझाव दीजिए ।

शालू सिंह

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