दिव्य धरा यह भारती ,छलक रहा आनंद ..
नव सौंदर्य सवारती ,,शीतल मंद सुगंध
उतारे आरती ,,जय माँ भारती “`

१ ` युग युग से अनगिन धराये ,,सेवा में तेरी
गंगा यमुना सिंधु नर्मदा,, कृष्णा कावेरी
जलजीवन से पावन करती,उपजाति है अन्न
नव सौंदर्य सवारती शीतल मंद सुगंध ,,
उतारे आरती ,,

२ गगन चूमती पर्वत माला ,,वैभव का आलय
सागर जिनके चरण पखारे ,गूंजे जय जय जय,
सारा जग आलोकित होता ,पाकर तेज प्रचंड
नव सौंदर्य सवारती ,

३ पावन भावन इसके आंगन ,पंछी चहक रहे
अंग अंग में रंग सुमन के ,खिलते महक रहे
सदा बहती मीठे फल ,अमृत रसधार अखंड
नव सौंदर्य सवारती ,,

, , , , , , , , , , , ,

मैं एक पत्नी होने के साथ साथ गृहिणी एवं माँ भी हुँ । लिखने का हुनर... ब्लॉग लिखती रहती हु... सनातन ग्रुप एक सकारात्मक ऊर्जा, आत्मनिर्भर बनाने की प्रेरणा देती जीवनी, राष्ट्रभक्ति गीत एवं कविताओं की माला पिरोया है । आग्रह :आपको पसन्द आये तो ऊर्जा देने के लिए शेयर एवं अपने सुझाव दीजिए ।

शालू सिंह

🙏 सकारात्मक जानकारी को फेसबुक पर पाने के लिए लाइक करें 👇

Leave a Reply