फिर क्या दूर किनारा
त्याग प्रेम के पथ पर चलकर
मूल न कोई हारा।
हिम्मत से पतवार सम्भालो
फिर क्या दूर किनारा।

हो जो नहीं अनुकूल हवा तो
परवा उसकी मत कर।
मौजों से टकराता बढ़ चल
उठ माँझी साहस धर।
धुन्ध पड़े या आँधी आये
उमड़ पड़े जल धारा॥१॥

हाथ बढ़ा पतवार को पकड़ो
खोल खेवय्या लंगर।
मदद मल्लाहों की करता है
बाबा भोले संकर।
जान हथेली पर रखकर
लाखों को तूने तारा॥२॥

दरियाओं की छाती पर था
तूने होश संभाला।
लहरों की थपकी से सोया
तूफानों ने पाला
जी भर खेला डोल भंवर से
जीवन मस्त गुजारा॥३॥

phira kyā dūra kinārā
tyāga prema ke patha para calakara
mūla na koī hārā |
himmata se patavāra sambhālo
phira kyā dūra kinārā |

ho jo nahīṁ anukūla havā to
paravā usakī mata kara |
maujoṁ se ṭakarātā baṛha cala
uṭha mājhī sāhasa dhara |
dhundha paṛea yā ādhī āye
umaṛa paṛe jala dhārā ||1||

hātha baṛhā patavāra ko pakaṛo
khola khevayyā laṁgara |
madada mallāhoṁ kī karatā hai
bābā bhole saṁkara |
jāna hathelī para rakhakara
lākhoṁ ko tūne tārā ||2||

dariyāoṁ kī chātī para thā
tūne hośa saṁbhālā |
laharoṁ kī thapakī se soyā
tūphānoṁ ne pālā
jī bhara khelā ḍola bhaṁvara se
jīvana masta gujārā ||3||

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मैं एक पत्नी होने के साथ साथ गृहिणी एवं माँ भी हुँ । लिखने का हुनर... ब्लॉग लिखती रहती हु... सनातन ग्रुप एक सकारात्मक ऊर्जा, आत्मनिर्भर बनाने की प्रेरणा देती जीवनी, राष्ट्रभक्ति गीत एवं कविताओं की माला पिरोया है । आग्रह :आपको पसन्द आये तो ऊर्जा देने के लिए शेयर एवं अपने सुझाव दीजिए ।

शालू सिंह

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