घनघोर गर्जना घन समूह
चमचम चमकती दामिनी
अति घूसर था वह दिन अशेष
कल्पान्त समय की यामिनी॥

प्रगटाती वर्षा का प्रलय काल
लहरों का चलता चण्ड नृत्य
सब भय विह्वल जन थे कहते
निःसंशय यह है रुद्र कृत्य॥

उन लहरों के आघातों में
एक दीप -खण्ड था रम्य दान्त
उस चंचलता में निश्चल सा
उस ताण्डव में भी स्तब्ध शांत॥

उस पर दीपक इक जलता था
घन धुआंधार में दीप्तिमान
उस प्रलयकाल में स्फूर्ति रुप
भयभीतों को था अभयदान॥

हे तमो -खण्ड के अमर दीप
हे केशव हे हृदयाभिराम
हे संघ शक्ति के प्राण रुप
है बार -बार तुमको प्रणाम॥

ghanaghora garjanā ghana samūha
camacama camakatī dāminī
ati ghūsara thā vaha dina aśeṣa
kalpānta samaya kī yāminī ||

pragaṭātī varṣā kā pralaya kāla
laharoṁ kā calatā caṇḍa nṛtya
saba bhaya vihvala jana the kahate
niaḥsaṁśaya yaha hai rudra kṛtya ||

una laharoṁ ke āghātoṁ meṁ
eka dīpa -khaṇḍa thā ramya dānta
usa caṁcalatā meṁ niścala sā
usa tāṇḍava meṁ bhī stabdha śāṁta ||

usa para dīpaka ika jalatā thā
ghana dhuāṁdhāra meṁ dīptimāna
usa pralayakāla meṁ sphūrti rupa
bhayabhītoṁ ko thā abhayadāna ||

he tamo -khaṇḍa ke amara dīpa
he keśava he hṛdayābhirāma
he saṁgha śakti ke prāṇa rupa
hai bāra -bāra tumako praṇāma ||

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मैं एक पत्नी होने के साथ साथ गृहिणी एवं माँ भी हुँ । लिखने का हुनर... ब्लॉग लिखती रहती हु... सनातन ग्रुप एक सकारात्मक ऊर्जा, आत्मनिर्भर बनाने की प्रेरणा देती जीवनी, राष्ट्रभक्ति गीत एवं कविताओं की माला पिरोया है । आग्रह :आपको पसन्द आये तो ऊर्जा देने के लिए शेयर एवं अपने सुझाव दीजिए ।

शालू सिंह

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