गुरु आये रे बरसे फुहार,
अब गुरु आये रे।।

दिव्य दिव्य ध्वनि खिरे,
धर्म ज्ञान आये,
हाँ रे आगम बताये,
हाँ रे आगम बताये,
हर मन जिनवाणी,
गूंजे रे हो,
गुरु आए रे बरसे फुहार,
अब गुरु आये रे।।

चौमासा जहाँ करे,
मेला लग जाये,
मुनिवर के रूप में,
जिनवर घर आये,
चौका लगाके आओ,
आहार करवाये,
गुरुवर की भक्ति में,
आओ हम रम जाए,
नाचे ये धरती,
गगन गाये रे,
गुरु आए रे बरसे फुहार,
अब गुरु आये रे।।

श्रीफल चढ़ाके आओ,
उत्सव मनाये,
गुरुवर की भक्ति का,
पुण्य कमाये,
गुरु के चरण का आज,
गंधोधक लगाए,
करके पूजा भक्ति,
गुरु का ही गुण गाये,
नाचे ये धरती,
गगन गाये रे,
गुरु आए रे बरसे फुहार,
अब गुरु आये रे।।

गुरु आये रे बरसे फुहार,
अब गुरु आये रे।।

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मैं एक पत्नी होने के साथ साथ गृहिणी एवं माँ भी हुँ । लिखने का हुनर... ब्लॉग लिखती रहती हु... सनातन ग्रुप एक सकारात्मक ऊर्जा, आत्मनिर्भर बनाने की प्रेरणा देती जीवनी, राष्ट्रभक्ति गीत एवं कविताओं की माला पिरोया है । आग्रह :आपको पसन्द आये तो ऊर्जा देने के लिए शेयर एवं अपने सुझाव दीजिए ।

शालू सिंह

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