है देह विश्व आत्मा है भारत-माता
सृष्टि-प्रलय-पर्यन्त अमर यह नाता ॥

यह सत्य-धर्म धारिणी धरा अति पावन
सब जग को लगती मनोहरा मन-भावन
विधि नदियों की मुक्तामाला पहनाता ॥१॥

कटि मे करधनी सुशोभित है विन्ध्याचल
सह्याद्रि-माल का राजदण्ड है कर-तल
श्री चरण चूमता विनत सिन्धु लहराता ॥२॥

थी वह अनादि-सी आदि भाव की ऊषा
भव को न मिली थी जब संस्कृती की भूषा
तब उदित हुआ रवि यहाँ स्वर्ण बिखराता ॥३॥

बन ग्राम नगर मे गूंजी वे ऋचाएँ
हर घर मे दमकी श्री की दीपशिखाएँ
धृति नारि धर्म से था पुरुषों का नाता ॥४॥

हम भ्रमित हुए अस्ताचल वाले देशों को जब देखा
अरुणाचल की छवि बनी नयन मे धुँधली कंचन रेखा
तब आया ज्योति-पुरुष केशव चेतन का सूर्य उगाता ॥५॥

त्याग-प्रेम का संबल शक्ति हमारी
अपने भविष्य मे अविचल भक्ति हमारी
जा बिदा दैन्य मै गीत विजय का गाता ॥६॥

hai deha viśva ātmā hai bhārata-mātā
sṛṣṭi-pralaya-paryanta amara yaha nātā ||

yaha satya-dharma dhāriṇī dharā ati pāvana
saba jaga ko lagatī manoharā mana-bhāvana
vidhi nadiyoṁ kī muktāmālā pahanātā ||1||

kaṭi me karadhanī suśobhita hai vindhyācala
sahyādri-māla kā rājadaṇḍa hai kara-tala
śrī caraṇa cūmatā vinata sindhu laharātā ||2||

thī vaha anādi-sī ādi bhāva kī ūṣā
bhava ko na milī thī jaba saṁskṛtī kī bhūṣā
taba udita huā ravi yahā svarṇa bikharātā ||3||

bana grāma nagara me gūṁjī ve ṛcāe
hara ghara me damakī śrī kī dīpaśikhāe
dhṛti nāri dharma se thā puruṣoṁ kā nātā ||4||

hama bhramita hue astācala vāle deśoṁ ko jaba dekhā
aruṇācala kī chavi banī nayana me dhudhalī kaṁcana rekhā
taba āyā jyoti-puruṣa keśava cetana kā sūrya ugātā ||5||

tyāga-prema kā saṁbala śakti hamārī
apane bhaviṣya me avicala bhakti hamārī
jā bidā dainya mai gīta vijaya kā gātā ||6||

, , , , , , , , , , , ,

मैं एक पत्नी होने के साथ साथ गृहिणी एवं माँ भी हुँ । लिखने का हुनर... ब्लॉग लिखती रहती हु... सनातन ग्रुप एक सकारात्मक ऊर्जा, आत्मनिर्भर बनाने की प्रेरणा देती जीवनी, राष्ट्रभक्ति गीत एवं कविताओं की माला पिरोया है । आग्रह :आपको पसन्द आये तो ऊर्जा देने के लिए शेयर एवं अपने सुझाव दीजिए ।

शालू सिंह

🙏 सकारात्मक जानकारी को फेसबुक पर पाने के लिए लाइक करें 👇

Leave a Reply