हिम शीत गया है बीत किन्तु ऋतुराज रिझाना शेष अभी
उन्सुक्त हुए नव -जीवन में जन ज्वार जगाना शेष अभी।

उल्लास उठाना शेष अभी।
अंगड़ाई लेती तरुणाई।
व्याकुल है आगे बढ़ने को।
धरती का भाग्य बदलने को ताकत अजमाना शेष अभी।

दुःशासन चीर उतार रहा।
बूढ़े सब बैठ देख रहे
पर भीम व्रती का क्रोधित हो कसमें है खाना शेष अभी।

संभ्रम में अब भी है अर्जुन
अपना है कौन पराया है
नूतन् परिवेश दिशा करके गीता समझाना शेष अभी।

फल की जिनको चाह नहीं
अभिमन्यु अनेकों प्रस्तुत हैं
अनगिन इन ऊर्जा-स्रोतों के हैं तार मिलाना शेष अभी।

जय का पथ दर्शन करने की
सागर लाँघे है-लाघेंगे
हम कौन हमारा दर्शन क्या यह याह दिलाना शेष अभी

hima śīta gayā hai bīta kintu ṛturāja rijhānā śeṣa abhī
unsukta hue nava -jīvana meṁ jana jvāra jagānā śeṣa abhī |

ullāsa uṭhānā śeṣa abhī |
aṁgaṛāī letī taruṇāī |
vyākula hai āge baṛhane ko |

dharatī kā bhāgya badalane ko tākata ajamānā śeṣa abhī |
duḥśāsana cīra utāra rahā |
būṛhe saba baiṭhae dekha rahe

para bhīma vratī kā krodhita ho kasameṁ hai khānā śeṣa abhī |
saṁbhrama meṁ aba bhī hai arjuna
apanā hai kauna parāyā hai
nūtan pariveśa diśā karake gītā samajhānā śeṣa abhī |

phala kī jinako cāha nahīṁ
abhimanyu anekoṁ prastuta haiṁ
anagina ina ūrjā-srotoṁ ke haiṁ tāra milānā śeṣa abhī |

jaya kā patha darśana karane kī
sāgara lāghe hai-lāgheṁge
hama kauna hamārā darśana kyā yaha yāha dilānā śeṣa abhī

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मैं एक पत्नी होने के साथ साथ गृहिणी एवं माँ भी हुँ । लिखने का हुनर... ब्लॉग लिखती रहती हु... सनातन ग्रुप एक सकारात्मक ऊर्जा, आत्मनिर्भर बनाने की प्रेरणा देती जीवनी, राष्ट्रभक्ति गीत एवं कविताओं की माला पिरोया है । आग्रह :आपको पसन्द आये तो ऊर्जा देने के लिए शेयर एवं अपने सुझाव दीजिए ।

शालू सिंह

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