हिंदू सारा एक मंत्र हा दाहि दिशांना घुमवू या
धरती-नभ-पातळहि भारु प्राण पणाला लावूया ॥ध्रु॥उच्चनीचता तण जाळावे धगधगत्या कर्त्रुत्वाने
समाज रसरसता अर्वाचिन पुनः निर्मुया यत्नाने
खचलेला अभिमान जागवू पिचली ह्रुदये सांधूया ॥१॥

कोणी नाही शत्रू आपूला प्रेमाने अवकाश भरु
चारित्र्याच्या आधारावर हिंदूराष्ट्र हे नव उभवू
समन्वयाने नम्रपणाने विद्रोहाला शमवूया ॥२॥

सामाजिक सन्मान निवारा समान सर्वा लाभावा
अन्न-वस्त्र-संस्कार लाभही सहजपणे सर्वा लाभावा
हीच एकता, समता, ममता, पथ ऐक्याचा चालूया ॥३॥

निज सत्वाची जाणिव नसता राष्ट्रजीवनी अर्थ नसे
परंपरा, इतिहास, पराक्रम आठव नुसाता व्यर्थ असे
कोटी मनांना सवे घेऊनी वैभव सारे मिळवू या ॥४॥

समाजभक्ति हीच प्रेरणा राष्ट्रभक्ति हे रुप तिचे
देशद्रोही निष्प्रभ होतील, दर्शन घडता शक्तिचे
विचार येतील अमरत्वाचे सर्व जगाला देऊया ॥५॥

आज कसोटी पुरुषार्थाची, व्यक्तित्वाच्या समर्पणाची
माय भूमीच्या पायी वाहू ओंजळ निज कर्त्रुत्वाची
अग्निपरिक्षा कोणॊ घेता सुवर्ण तेजे तळपुया ॥६॥

hiMdU sArA eka maMtra hA dAhi diSAMnA GumavU yA
dharatI-naBa-pAtaLahi BAru prANa paNAlA lAvUyA ||dhru||

uccanIcatA taNa jALAve dhagadhagatyA kartrutvAne
samAja rasarasatA arvAcina punaH nirmuyA yatnAne
KacalelA aBimAna jAgavU picalI hrudaye sAMdhUyA ||1||

koNI nAhI SatrU ApUlA premAne avakASa Baru
cAritryAcyA AdhArAvara hiMdUrAShTra he nava uBavU
samanvayAne namrapaNAne vidrohAlA SamavUyA ||2||

sAmAjika sanmAna nivArA samAna sarvA lABAvA
anna-vastra-saMskAra lABahI sahajapaNe sarvA lABAvA
hIca ekatA, samatA, mamatA, patha aikyAcA cAlUyA ||3||

nija satvAcI jANiva nasatA rAShTrajIvanI artha nase
paraMparA, itihAsa, parAkrama AThava nusAtA vyartha ase
koTI manAMnA save Ge^^UnI vaiBava sAre miLavU yA ||4||

samAjaBakti hIca preraNA rAShTraBakti he rupa tice
deSadrohI niShpraBa hotIla, darSana GaDatA Saktice
vicAra yetIla amaratvAce sarva jagAlA de^^UyA ||5||

Aja kasoTI puruShArthAcI, vyaktitvAcyA samarpaNAcI
mAya BUmIcyA pAyI vAhU oMjaLa nija kartrutvAcI
agniparikShA koNO GetA suvarNa teje taLapuyA ||6||

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मैं एक पत्नी होने के साथ साथ गृहिणी एवं माँ भी हुँ । लिखने का हुनर... ब्लॉग लिखती रहती हु... सनातन ग्रुप एक सकारात्मक ऊर्जा, आत्मनिर्भर बनाने की प्रेरणा देती जीवनी, राष्ट्रभक्ति गीत एवं कविताओं की माला पिरोया है । आग्रह :आपको पसन्द आये तो ऊर्जा देने के लिए शेयर एवं अपने सुझाव दीजिए ।

शालू सिंह

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