सर्वमंगल मांगल्यां देवीं सर्वार्थ साधिकाम् ।
शरण्यां सर्वभूतानां नमामो भूमिमातरम् ॥

सच्चिदानन्द रुपाय विश्वमंगल हेतवे ।
विश्वधर्मैक मूलाय नमोस्तु परमात्मने ॥

विश्वधर्मविकासार्थं प्रभो संघटिता वयम् ।
शुभामाशिषमस्तमभ्यम देहि तत परिपूर्तये ॥

अजय्यमात्मसामर्थ्यं सुशीलम लोक पूजितम् ।
ज्ञानं च देहि विश्वेश ध्येयमार्ग प्रकाशकम् ॥

समुत्कर्षोस्तु नो नित्यं नि:श्रेयस समन्वित ।
तत्साधकम स्फुरत्वन्त: सुवीरव्रतमुज्वलम् ॥

विश्वधर्म प्रकाशेन विश्वशांति प्रवर्तके ।
हिन्दुसंघटना कार्ये ध्येयनिष्ठा स्थिरास्तुन: ॥

सघंशक्तिर्विजेत्रीयं कृतवास्मध्दर्मरक्षणम् l
परमं वैभवं प्राप्तुं समर्थास्तु तवाशिषा ॥

त्वदीय पुण्ये कार्येस्मिन् विश्वकल्याणसाधके ।
त्याग सेवा व्रतस्यायम् कायो मे पततु प्रभो ॥

मैं एक पत्नी होने के साथ साथ गृहिणी एवं माँ भी हुँ । लिखने का हुनर... ब्लॉग लिखती रहती हु... सनातन ग्रुप एक सकारात्मक ऊर्जा, आत्मनिर्भर बनाने की प्रेरणा देती जीवनी, राष्ट्रभक्ति गीत एवं कविताओं की माला पिरोया है । आग्रह :आपको पसन्द आये तो ऊर्जा देने के लिए शेयर एवं अपने सुझाव दीजिए ।

शालू सिंह

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