हो गये हैं स्वप्न सब साकार कैसे मान लें हम।
टल गया सर से व्यथा का भार कैसे मान लें हम।

आ गया स्वातंत्र्य फिर भी चेतना आने न पाई।
प्रगति के ही नाम श्रध्दा और श्रम को दी विदाई।
इस भयंकर मौज को पतवार कैसे मान लें हम
हो गये हैं॥१॥

देश सारा घिर रहा है सैन्य के घन बादलों से।
घिर रही प्रिय मातृभू है चतुर्दिक खल अरिदलों से।
इस अमा के तिमिर को ही अरुणिमा क्या मान लें हम
हो गये हैं॥२॥

राष्ट्र को सब लोग भूले स्वार्थ है युग मंत्र सारा।
प्रान्त भाषा भेद की है बह रही नित कलुष धारा।
इस पराये तन्त्र को निज तन्त्र कैसे मान लें हम
हो गये हैं॥३॥

वेष वाणी तत्त्व-दर्शन दूसरों का यह सभी ले।
विकृतियों को ग्रहण करते निज प्रकृति को आज भूले।
दूसरों की यह नकल है अस्मिता क्या मान लें हम
हो गये हैं॥४॥

अलस तज कर उद्यमी बन लें ह्रदय में ध्येय निष्ठा।
हम सभी का एक व्रत हो विश्व में माँ की प्रतिष्ठा।
देश के भवितव्य को ही अब चुनौती मान लें हम।
हो गये हैं ॥५।

English Transliteration:
ho gaye haiṁ svapna saba sākāra kaise māna leṁ hama |
ṭala gayā sara se vyathā kā bhāra kaise māna leṁ hama |

ā gayā svātaṁtrya phira bhī cetanā āne na pāī |
pragati ke hī nāma śradhdā aura śrama ko dī vidāī |
isa bhayaṁkara mauja ko patavāra kaise māna leṁ hama
ho gaye haiṁ ||1||

deśa sārā ghira rahā hai sainya ke ghana bādaloṁ se |
ghira rahī priya mātṛbhū hai caturdika khala aridaloṁ se |
isa amā ke timira koa hī aruṇimā kyā māna leṁ hama
ho gaye haiṁ ||2||

rāṣṭra ko saba loga bhūle svārtha hai yuga maṁtra sārā |
prānta bhāṣā bheda kī hai baha rahī nita kaluṣa dhārā |
isa parāye tantra ko nija tantra kaise māna leṁ hama
ho gaye haiṁ ||3||

veṣa vāṇī tattva-darśana dūsaroṁ kā yaha sabhī le |
vikṛtiyoṁ ko grahaṇa karate nija prakṛti ko āja bhūle |
dūsaroṁ kī yaha nakala hai asmitā kyā māna leṁ hama
ho gaye haiṁ ||4||

alasa taja kara udyamī bana leṁ hradaya meṁ dhyeya niṣṭhā |
hama sabhī kā eka vrata ho viśva meṁ mā kī pratiṣṭhā |
deśa ke bhavitavya ko hī aba cunautī māna leṁ hama |
ho gaye haiṁ ||5|

, , , , , , , , , , , ,

मैं एक पत्नी होने के साथ साथ गृहिणी एवं माँ भी हुँ । लिखने का हुनर... ब्लॉग लिखती रहती हु... सनातन ग्रुप एक सकारात्मक ऊर्जा, आत्मनिर्भर बनाने की प्रेरणा देती जीवनी, राष्ट्रभक्ति गीत एवं कविताओं की माला पिरोया है । आग्रह :आपको पसन्द आये तो ऊर्जा देने के लिए शेयर एवं अपने सुझाव दीजिए ।

शालू सिंह

🙏 सकारात्मक जानकारी को फेसबुक पर पाने के लिए लाइक करें 👇

Leave a Reply