जन-जन के मन का तर्पण हो।
अग्निहोत्र हो रहा भूमि पर जीवन -आहुति का अर्पण हो
जन-जन के मन का तर्पण हो॥

कोटि शीर्ष धारण कर भू पर राष्ट्र-पुरुष अवतरित हुआ है
कोटि नयन की मधुर दृष्टि से रुद्र-रोष अब स्फुरित हुआ है।
कोटि बाहु की प्रबल शक्ति से मातृ-भूमि का संरक्षण हो॥
जन-जन के मन का तर्पण हो॥१॥

यज्ञ हो रहा राष्ट्र-त्राण का सुरभित प्रान्त का कोना
यज्ञ धूम बढ़ रहा गगन में दिव्य शक्ति है जागृत होना
स्वाहा-स्वधा पुण्य घोषों से राष्ट्र-पुरुष का शुभ अर्चन हो॥
जन-जन के मन का तर्पण हो॥२॥

देव भूमि भारत वसुन्धरा की सेवा का प्रिय व्रत लेकर
मातृ-भूमि पर मर मिटने की दिव्य भावना का बल लेकर
प्रबल पराक्रम दृढ़ पौरुष से भारत माँ का आराधन हो॥
जन-जन के मन का तर्पण हो ॥३॥

शुध्द प्रखरतर राष्ट्रभक्ति की लहर उठे सबकी नस-नस में
बलिदानी भावों की आँधी उठे आज जन -जन मानस में
शिव ताण्डव का सरगम गूँजे राष्ट्र-धर्म का परिरक्षण हो
जन-जन के मन का तर्पण हो ॥४॥

jana-jana ke mana kā tarpaṇa ho |
agnihotra ho rahā bhūmi para jīvana -āhuti kā arpaṇa ho
jana-jana ke mana kā tarpaṇa ho ||

koṭi śīrṣa dhāraṇa kara bhū para rāṣṭra-puruṣa avatarita huā hai
koṭi nayana kī madhura dṛṣṭi se rudra-roṣa aba sphurita huā hai |
koṭi bāhu kī prabala śakti se mātṛ-bhūmi kā saṁrakṣaṇa ho ||
jana-jana ke mana kā tarpaṇa ho ||1||

yajña ho rahā rāṣṭra-trāṇa kā surabhita prānta kā konā
yajña dhūma baṛha rahā gagana meṁ divya śakti hai jāgṛta honā
svāhā-svadhā puṇya ghoṣoṁ se rāṣṭra-puruṣa kā śubha arcana ho ||
jana-jana ke mana kā tarpaṇa ho ||2||

deva bhūmi bhārata vasundharā kī sevā kā priya vrata lekara
mātṛ-bhūmi para mara miṭane kī divya bhāvanā kā bala lekara
prabala parākrama dṛṛha pauruṣa se bhārata mā kā ārādhana ho ||
jana-jana ke mana kā tarpaṇa ho ||3||

śudhda prakharatara rāṣṭrabhakti kī lahara uṭhe sabakī nasa-nasa meṁ
balidānī bhāvoṁ kī ādhī uṭhe āja jana -jana mānasa meṁ
śiva tāṇḍava kā saragama gūje rāṣṭra-dharma kā parirakṣaṇa ho
jana-jana ke mana kā tarpaṇa ho ||4||

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मैं एक पत्नी होने के साथ साथ गृहिणी एवं माँ भी हुँ । लिखने का हुनर... ब्लॉग लिखती रहती हु... सनातन ग्रुप एक सकारात्मक ऊर्जा, आत्मनिर्भर बनाने की प्रेरणा देती जीवनी, राष्ट्रभक्ति गीत एवं कविताओं की माला पिरोया है । आग्रह :आपको पसन्द आये तो ऊर्जा देने के लिए शेयर एवं अपने सुझाव दीजिए ।

शालू सिंह

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