जय जय कोटि भुजस्विनी माता
सतयुग से कलियुग तक जिसकी
महिमा का रथ काल चलाता॥

जिसका वाहन स्वयं प्रकाशित
शौर्य सुर्य सा दिल दहलाता
जिसके खड्ग् प्रहार तले खल
शीश रक्त का बहता॥१॥

अनगिन अमर पुज्य के अनुपम
दिव्य अंश का अमर समर्पण
तुझमें प्रबल पराक्रम चमके
कोटि सुर्य का तेज लजाता॥२॥

गौ श्रुति संकृत के नव घातक
महिष बुध्दि दनुजों के पातक
तुमको आज चुनौती देते
ऊठे शूल माँ अभय प्रदाता॥३॥

रौद्र रुपिणी विकट कालिके
जग नन्दन गणपति सुपालिके
शंकर प्रलयंकर पुजित हे
सत्त्व स्थपिनी शांति विधाता॥४॥

jaya jaya koṭi bhujasvinī mātā
satayuga se kaliyuga taka jisakī
mahimā kā ratha kāla calātā ||

jisakā vāhana svayaṁ prakāśita
śaurya surya sā dila dahalātā
jisake khaḍg prahāra tale khala
śīśa rakta kā bahatā ||1||

anagina amara pujya ke anupama
divya aṁśa kā amara samarpaṇa
tuajhameṁ prabala parākrama camake
koṭi surya kā teja lajātā ||2||

gau śruti saṁkṛta ke nava ghātaka
mahiṣa budhdi danujoṁ ke pātaka
tumako āja cunautī dete
ūṭhe śūla mā abhaya pradātā ||3||

raudra rupiṇī vikaṭa kālike
jaga nandana gaṇapati supālike
śaṁkara pralayaṁkara pujita he
sattva sthapinī śāṁti vidhātā ||4||

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मैं एक पत्नी होने के साथ साथ गृहिणी एवं माँ भी हुँ । लिखने का हुनर... ब्लॉग लिखती रहती हु... सनातन ग्रुप एक सकारात्मक ऊर्जा, आत्मनिर्भर बनाने की प्रेरणा देती जीवनी, राष्ट्रभक्ति गीत एवं कविताओं की माला पिरोया है । आग्रह :आपको पसन्द आये तो ऊर्जा देने के लिए शेयर एवं अपने सुझाव दीजिए ।

शालू सिंह

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