जय मातृ-भूमि जीवन भर
निशि दिन तेरा ही गुण गायें
फिर भी तेरा पार नहीं हम पायें॥ १ ॥

सबसे ऊँचा मस्तक तेरा चरणों में सागर का घेरा
दशों दिशाएँ सांझ सबेरे तुझको शीश झुकाएँ ॥ २ ॥

तूने दिया खेलता बचपन फिर अथाह बलशाली यौवन
शत – शत जीवन तेरी सेवा का हम अवसर पायें॥ ३ ॥

भौतिकता में जब जग मोहित तू थी दर्शन से आच्छादित
समय – समय पर ईशमुखों से तूने धर्म उपदेश कराये॥ ४ ॥

English Transliteration:
jaya mātṛ-bhūmi jīvana bhara
niśi dina terā hī guṇa gāyeṁ
phira bhī terā pāra nahīṁ hama pāyeṁ || 1 ||

sabase ūcā mastaka terā caraṇoṁ meṁ sāgara kā gherā
daśoṁ diśāe sāṁjha sabere tujhako śīśa jhukāe || 2 ||

tūne diyā khelatā bacapana phira athāha balaśālī yauvana
śata – śata jīvana terī sevā kā hama avasara pāyeṁ || 3 ||

bhautiakatā meṁ jaba jaga mohita tū thī darśana se ācchādita
samaya – samaya para īśamukhoṁ se tūne dharma upadeśa karāye || 4 ||

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मैं एक पत्नी होने के साथ साथ गृहिणी एवं माँ भी हुँ । लिखने का हुनर... ब्लॉग लिखती रहती हु... सनातन ग्रुप एक सकारात्मक ऊर्जा, आत्मनिर्भर बनाने की प्रेरणा देती जीवनी, राष्ट्रभक्ति गीत एवं कविताओं की माला पिरोया है । आग्रह :आपको पसन्द आये तो ऊर्जा देने के लिए शेयर एवं अपने सुझाव दीजिए ।

शालू सिंह

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