मृषा मृत्यु का भय है
जीवन की ही जय है

जीव की जड़ जमा रहा है
नित नव वैभव कमा रहा है
पिता पुत्र में समा रहा है

यह आत्मा अक्षय है
जीवन की ही जय है

नया जन्म ही जग पाता है
मरण मूढ़-सा रह जाता है
एक बीज सौ उपजाता है

सृष्टा बड़ा सदय है
जीवन की ही जय है

जीवन पर सौ बार मरूँ मैं
क्या इस धन को गाड़ धरूँ मैं
यदि न उचित उपयोग करूँ मैं

तो फिर महाप्रलय है
जीवन की ही जय है

, , , , , , , , ,

मैं एक पत्नी होने के साथ साथ गृहिणी एवं माँ भी हुँ । लिखने का हुनर... ब्लॉग लिखती रहती हु... सनातन ग्रुप एक सकारात्मक ऊर्जा, आत्मनिर्भर बनाने की प्रेरणा देती जीवनी, राष्ट्रभक्ति गीत एवं कविताओं की माला पिरोया है । आग्रह :आपको पसन्द आये तो ऊर्जा देने के लिए शेयर एवं अपने सुझाव दीजिए ।

शालू सिंह

🙏 सकारात्मक जानकारी को फेसबुक पर पाने के लिए लाइक करें 👇

Leave a Reply