जीवन बन तू दीप समान
जल-जल कर सर्वस्व मिटा दे बन कर्तव्य प्रधान॥

दुनिया में छाया अँधियारा
भटक रहा पंथी बेचारा
अन्धकार में कर उजियारा -दे दे पथ का ज्ञान॥

बार-बार बत्ती उकसाकर
धीरे-धीरे देह जलाकर
हँसते-हँसते फूल गिराकर दिखा मधुर मुस्कान॥
अन्तिम क्षण तक ज्योति जलाकर हँस-हँसकर प्रस्थान॥

jīvana bana tū dīpa samāna
jala-jala kara sarvasva miṭā de bana kartavya pradhāna ||

duniyā meṁ chāyā adhiyārā
bhaṭaka rahā paṁthī becārā
andhakāra meṁ kara ujiyārā -de de patha kā jñāna ||

bāra-bāra battī ukasākara
dhīre-dhīre deha jalākara
hasate-hasate phūla girākara dikhā madhura muskāna ||
antima kṣaṇa taka jyoti jalākara hasa-hasakara prasthāna ||

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मैं एक पत्नी होने के साथ साथ गृहिणी एवं माँ भी हुँ । लिखने का हुनर... ब्लॉग लिखती रहती हु... सनातन ग्रुप एक सकारात्मक ऊर्जा, आत्मनिर्भर बनाने की प्रेरणा देती जीवनी, राष्ट्रभक्ति गीत एवं कविताओं की माला पिरोया है । आग्रह :आपको पसन्द आये तो ऊर्जा देने के लिए शेयर एवं अपने सुझाव दीजिए ।

शालू सिंह

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