लक्ष तक पहुंचे बिना पथ मे पथिक विश्राम कैसा
पथ मे पथिक विश्राम कैसा ॥धृ॥

लक्ष है अति दूर दुर्गम मार्ग है हम जानते है
किन्तु पथ के कंटकों को हम सुमन ही मानते है
जब प्रगति का नाम जीवन यह अकाल विराम कैसा ॥१॥

धनुष से जो छूटता वह बाण कब मग मे ठहरता
देखते ही देखते वह लक्ष का है वेध करता
लक्ष प्रेरित बाण है हम ठहरने का काम कैसा ॥२॥

बाल रवि की स्वर्ण किरणे निमिष मे भू-पर पहुँचती
कालिमा का नाश करती ज्योति जग मग जगत करती
ज्योति के चिर पुंज है हम को अमां से काम कैसा ॥३॥

आज पहले से निकट है देख लो वह लक्ष अपना
पग बढ़ते ही चलो बस सत्य होगा शीघ्र सपना
धर्म पथ के पथिक को फिर दैव दक्षिण वाम कैसा ॥४॥

lakṣa taka pahuṁce binā patha me pathika viśrāma kaisā
patha me pathika viśrāma kaisā ||dhṛ ||

lakṣa hai ati dūra durgama mārga hai hama jānate hai
kintu patha ke kaṁṭakoṁ ko hama sumana hī mānate hai
jaba pragati kā nāma jīvana yaha akāla virāma kaisā ||1||

dhanuṣa se jo chūṭatā vaha bāṇa kaba maga me ṭhaharatā
dekhate hī dekhate vaha lakṣa kā hai vedha karatā
lakṣa prerita bāṇa hai hama ṭhaharane kā kāma kaisā ||2||

bāla ravi kī svarṇa kiraṇe nimiṣa me bhū-para pahucatī
kālimā kā nāśa karatī jyoti jaga maga jagata karatī
jyoti ke cira puṁja hai hama ko amāṁ se kāma kaisā ||3||

āja pahale se nikaṭa hai dekha lo vaha lakṣa apanā
paga baṛhate hī calo basa satya hogā śīghra sapanā
dharma patha ke pathika ko phira daiva dakṣiṇa vāma kaisā ||4||

मैं एक पत्नी होने के साथ साथ गृहिणी एवं माँ भी हुँ । लिखने का हुनर... ब्लॉग लिखती रहती हु... सनातन ग्रुप एक सकारात्मक ऊर्जा, आत्मनिर्भर बनाने की प्रेरणा देती जीवनी, राष्ट्रभक्ति गीत एवं कविताओं की माला पिरोया है । आग्रह :आपको पसन्द आये तो ऊर्जा देने के लिए शेयर एवं अपने सुझाव दीजिए ।

शालू सिंह

🙏 सकारात्मक जानकारी को फेसबुक पर पाने के लिए लाइक करें 👇
One thought on “Lakshya Taka Pahunche bina-लक्ष तक पहुंचे बिना”

Leave a Reply