ध्येय मार्ग पर चले वीर तो
ध्येय मार्ग पर चले वीर तो पीछे अब न निहारो
हिम्मत कभी न हारो॥

तुम मनुष्य हो शक्ति तुम्हारे जीवन का संबल है
और तुम्हारा अतुलित साहस गिरी की भाँति अचल है
तो साथी केवल पल-भर को मोह-माया बिसारो॥
हिम्मत कभी न हारो ॥१॥

मत देखो कितनी दूरी है कितना लम्बा मग है
और न सोचो साथ तुम्हारे आज कहाँ तक जग है
लक्ष्य-प्राति की बलिवेदी पर अपना तन मन वारो
हिम्मत कभी न हारो ॥२॥

आज तुम्हारे साहस पर ही मुक्ति सुधा निर्भर है
आज तुम्हारे स्वर के साथी कोटि कंठ के स्वर है
तो साथी बढ़ चलो मार्ग पर आगे सदा निहारो॥
हिम्मत कभी न हारो ॥३॥

मैं एक पत्नी होने के साथ साथ गृहिणी एवं माँ भी हुँ । लिखने का हुनर... ब्लॉग लिखती रहती हु... सनातन ग्रुप एक सकारात्मक ऊर्जा, आत्मनिर्भर बनाने की प्रेरणा देती जीवनी, राष्ट्रभक्ति गीत एवं कविताओं की माला पिरोया है । आग्रह :आपको पसन्द आये तो ऊर्जा देने के लिए शेयर एवं अपने सुझाव दीजिए ।

शालू सिंह

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