मुक्त प्राणों में हमारे देश का अभिमान जागे॥

हो गये साकार सपने
स्कन्ध पर अब भार अपने
पापिनी तन्द्रा उदासी
कर्म का अवसान भागे॥१॥

स्वार्थ- परता से विलग हो
त्याग -सिञ्चित ध्येय- मग हो
देश पर ही शुभ मरण की
प्राण ये पहचान माँगे॥२॥

छोड मन की संकुचितता
भर ह्रदय में स्नेह ममता
जन-जनार्दन का मधुरतम
एक नव-सम्मान जागे॥३॥

बाँधे कोटि हों अब खडे हम
शक्ति-संग्रह कर बढें हम
चल रहे बाधा हटाते
भक्त के भगवान आगे ॥४॥

mukta prāṇoṁ meṁ hamāre deśa kā abhimāna jāge ||

ho gaye sākāra sapane
skandha para aba bhāra apane
pāpinī tandrā udāsī
karma kā avasāna bhāge ||1||

svārtha- paratā se vilaga ho
tyāga -siñcita dhyeya- maga ho
deśa para hī śubha maraṇa kī
prāṇa ye pahacāna māge ||2||

choḍa mana kī saṁkucitatā
bhara hradaya meṁ sneha mamatā
jana-janārdana kā madhuratama
eka nava-sammāna jāge ||3||

bādhe koṭi hoṁ aba khaḍe hama
śakti-saṁgraha kara baḍheṁ hama
cala rahe bādhā haṭāte
bhakta ke bhagavāna āge ||4||

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मैं एक पत्नी होने के साथ साथ गृहिणी एवं माँ भी हुँ । लिखने का हुनर... ब्लॉग लिखती रहती हु... सनातन ग्रुप एक सकारात्मक ऊर्जा, आत्मनिर्भर बनाने की प्रेरणा देती जीवनी, राष्ट्रभक्ति गीत एवं कविताओं की माला पिरोया है । आग्रह :आपको पसन्द आये तो ऊर्जा देने के लिए शेयर एवं अपने सुझाव दीजिए ।

शालू सिंह

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