पंथ स्वयं आयेगा।
उर में है यदि आग लक्ष्य की।
पंथ स्वयं आयेगा॥

नदियों को पहले से किसने जलधि राह बतलाई
फूटी वह पत्थर के उर से शिला-शिला टकराई
करति हाहाकार फिरी वह वन-वन में एकाकी
और अंत में सागर की बाहों में सिमट समाई
तम से जो लड़ता तिल-तिल जल ज्योति-सुमन पायेगा
पंथ स्वयं आयेगा॥१॥

मन में सुनो धधकते स्वर से कौन पुकार रहा है
मुख से आह निकाले बिन बस जलना जलना जलना
बढ़ो स्वयं काँटों में जाकर ध्येय मुस्करायेगा।
पंथ स्वयं आयेगा॥२॥

नदी सूखकर झुककर पर्वत तुमको देंगे राह
बढ़ते जाओ अपने पथ पर कम हो न उत्साह
जन-जन के मानस में फूँको देश प्रेम की ज्वाला
संघ शक्ति की ज्वाला
आसेतु हिमाचल फिर अखण्ड होवे भारत यह सारा
हिमगिरि के उत्तुंग शिखर पर भगवा फहरायेगा
पंथ स्वयं आयेगा ॥३॥

paṁtha svayaṁ āyegā |
ura meṁ hai yadi āga lakṣya kī |
paṁtha svayaṁ āyegā ||

nadiyoṁ ko pahale se kisane jaladhi rāha batalāī
phūṭī vaha patthara ke ura se śilā-śilā ṭakarāī
karati hāhākāra phirī vaha vana-vana meṁ ekākī
aura aṁta meṁ sāgara kī bāhoṁ meṁ simaṭa samāī
tama se jo laṛatā tila-tila jala jyoti-sumana pāyegā
paṁtha svayaṁ āyegā ||1||

mana meṁ suno dhadhakate svara se kauna pukāra rahā hai
mukha se āha nikāle bina basa jalanā jalanā jalanā
baṛho svayaṁ kāṭoṁ meṁ jākara dhyeya muskarāyegā |
paṁtha svayaṁ āyegā ||2||

nadī sūkhakara jhukakara parvata tumako deṁge rāha
baṛhate jāo apane patha para kama ho na utsāha
jana-jana ke mānasa meṁ phūko deśa prema kī jvālā
saṁgha śakti kī jvālā
āsetu himācala phira akhaṇḍa hove bhārata yaha sārā
himagiri ke uttuṁga śikhara para bhagavā phaharāyegā
paṁtha svayaṁ āyegā ||3||

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मैं एक पत्नी होने के साथ साथ गृहिणी एवं माँ भी हुँ । लिखने का हुनर... ब्लॉग लिखती रहती हु... सनातन ग्रुप एक सकारात्मक ऊर्जा, आत्मनिर्भर बनाने की प्रेरणा देती जीवनी, राष्ट्रभक्ति गीत एवं कविताओं की माला पिरोया है । आग्रह :आपको पसन्द आये तो ऊर्जा देने के लिए शेयर एवं अपने सुझाव दीजिए ।

शालू सिंह

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