पवनमुक्तासन योग, विधि, लाभ, और सावधानी Pavanmuktasan Yog, Yidhi, Labh Aur Sawdhani

0

जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है पवनमुक्तासन यह आसन 3 शब्दों के मेल से बना है पवन का अर्थ है वायु, मुक्त अर्थात निकालना  या वाहर करना आसन अर्थात मुद्रा

यह आसन पाचन तंत्र के विकार  को नष्ट करता है। और अतिरिक्त वायु  को बाहर निकालता है। और आपके पाचन तंत्र को बेहतर बनाता है आज के समय में अधिकतर लोग  पाचन संबंधी विकार से ग्रस्त होते हैं। पवनमुक्तासन करके इन विकारों से मुक्त हो सकते हैं। इस लेख में हम जानेंगे कि पवनमुक्तासन क्या है ?उसकी कौन सी विधि है ?उसको कैसे किया जाता है?, और उसे क्या-क्या लाभ होते हैं ? पवनमुक्तासन  करते समय हमें कौन सी सावधानियां बरतनी चाहिए ?

पवनमुक्तासन क्या है?- Pavanmuktasan Kya Hai

पवनमुक्तासन  पाचन संबंधी विकार में वायु को बाहर करने की विधि है। यह आसन पाचन तंत्र में गड़बड़ी गैस, कब्ज ,बदहजमी अर्थात पाचन संबंधित विकारों को नष्ट करने में मदद करता है।

पवनमुक्तासन करने की विधि क्या है?- Pavanmuktasan Karne ki Vidhi Kya Hai

1-किसी साफ-सुथरे स्थान पर पेट के बल लेट जाएं

2-सीधे लेट कर दाएं पैर को मोड़ने तथा दोनों हाथों से पैर के पंजे को पकड़कर श्वास को बाहर निकालते हुए पैर को खींचे।

3-तब सिर उठाकर पैर के अंगूठे से नासिका को स्पर्श करें।

4-इसी प्रकार बाएं पैर से इस अभ्यास को करें और अंत में दोनों पैरों से एक साथ यह आसन करें।

5-दोनों पैरों को मोड़कर पैरों के अंगूठे को अपनी नासिका से स्पर्श कराएं।

6-कुछ सेकंड तक इसी स्थिति में श्वास लें और श्वास को बाहर छोड़ें।

7-धीरे-धीरे सिर कंधे और पैरों को वापिस शुरुआती मुद्रा में ले जाएं।

पवनमुक्तासन  के लाभ क्या है? Pavanmuktasan Ke Labh(Benefits) Kya Hai

एक पुरानी कहावत है कि अगर आपका मस्तिष्क और पेट स्वस्थ है, तो आप धनी हैं। अर्थात जब मन शांत हो और पेट में किसी प्रकार की बीमारी ना हो, तब व्यक्ति स्वस्थ एवं शांत होता है। वास्तव में दोनों एक दूसरे से जुड़े होते हैं। मस्तिष्क को शांत करने के लिए आवश्यक है, कि हमारा पाचन तंत्र मजबूत बना रहे।पेट की समस्याओं से पाचन तंत्र के विकारों को दूर करने के लिए पवनमुक्तासन एक अद्भुत प्रयोग है।

पेट की चर्बी को हटाने के लिए

यह आसन पेट की चर्बी को कम करने में मददगार है, इस आसन को करने से आपका पेट समतल हो जाता है बढ़ी हुई चर्बी कम हो जाती है। यह आसन उदर को फ्लैट एवं समतल बनाता है।

एसिडिटी

यह आसन एसिडिटी को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है ,इस आसन को करने से एसिडिटी से छुटकारा मिल जाता है।

पेट से जहरीली गैस बाहर निकालने में

इस आसन को करने से पेट में मौजूद अतिरिक्त गैस ,अशुद्ध वायु बाहर निकल जाती है और गैस से छुटकारा मिल जाता है।

पेट के स्वास्थ्य में

इस आसन को करने से संपूर्ण उदर रोगों का नाश होता है अम्लपित्त, एसिडिटी, गैस और पाचन संबंधित समस्त प्रकार के विकार इस आसन को करने से नष्ट हो जाते हैं।

रीड की हड्डी के लिए

यह आसन रीढ़ की हड्डी को लचीला एवं मजबूत बनाता है।

फेफड़ों को स्वस्थ रखने के लिए

इस आसन को करने से फेफड़े मजबूत और स्वस्थ होते हैं।

नाभि को ठीक करने के लिए यह अभ्यास महत्वपूर्ण है।

नाभि के ठीक होने से गैस, पेट दर्द, कब्ज ,अतिसार ,दुर्बलता एवं आलस्य स्वतः ही दूर हो जाते हैं।

आमाशय ,अग्नाशय एवं आंतों के लिए यह आसन हितकारी है।

पवनमुक्तासन करते समय कौन सी सावधानी बरतनी चाहिए?- Pavanmuktasan Karte Samay Kaun si Sawdhani Baratni Chahiye

1-अगर आपके कमर में दर्द हो तो इस आसन का अभ्यास कदापि न करें।

2-घुटनों के दर्द में भी यह आसन नहीं करना चाहिए।

3-भोजन करने के तुरंत बाद यह आसन कदापि न करें।

4-इस आसन को वह व्यक्ति भी न करें जिनकी गर्दन में दर्द है।

5-उच्च रक्तचाप, हर्निया ,दिल की बीमारी मे यह आसन नहीं करना चाहिए।

6-गर्भावस्था के तीसरे महीने के बाद भी यह आसन नहीं करना चाहिए।

पवनमुक्तासन करने के बाद करने वाले आसन

पवनमुक्तासन करने के बाद आप शवासन जिसे योगनिद्रा कहते है , करें।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *