प्रलय की कर गर्जना हिमवान।
चूर कर दे शत्रु का अभिमान॥१॥

शत्रु का आघात सह ले ढाल बनकर
माँ मिटा दे आज रिपु को काल बनकर
जाग प्रहरी फिर विदेशी जाल बुनकर
कर रहे आघात तेरी हरित भू पर
धर्म रक्षण हेतु बन भगवान॥२॥

दे उठा तू शम्भु शिव को आज फिर से
दे निकलने प्रबल विष की धार शिर से
चक्षु अपना खोल दे वह शत्रु जिससे
भस्म होवे धरा काँपे गगन भय से
लोकहित में फिर करें विषपान॥३॥

दे भवानी शक्ति अक्षय औ विजयवर
हो सबल हम ध्येय निष्ठित ध्येय लेकर
केसरी बाना सजाये ध्वजा लेकर
कर रहे रण-गान कर में खड्ग धर कर
भारत भू पर हुआ स्वर्ण -विहान॥४॥

pralaya kī kara garjanā himavāna |
cūra kara de śatru kā abhimāna ||1||

śatru kā āghāta saha le ḍhāla banakara
mā miṭā de āja ripu ko kāla banakara
jāga praharī phira videśī jāla bunakara
kara rahe āghāta terī harita bhū para
dharma rakṣaṇa hetu bana bhagavāna ||2||

de uṭhā tū śambhu śiva ko āja phira se
de nikalane prabala viṣa kī dhāra śira se
cakṣu apanā khola de vaha śatru jisase
bhasma hove dharā kāpe gagana bhaya se
lokahita meṁ phira kareṁ viṣapāna ||3||

de bhavānī śakti akṣaya au vijayavara
ho sabala hama dhyeya niṣṭhita dhyeya lekara
kesarī bānā sajāye dhvajā lekara
kara rahe raṇa-gāna kara meṁ khaḍga dhara kara
bhārata bhū para huā svarṇa -vihāna ||4||

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मैं एक पत्नी होने के साथ साथ गृहिणी एवं माँ भी हुँ । लिखने का हुनर... ब्लॉग लिखती रहती हु... सनातन ग्रुप एक सकारात्मक ऊर्जा, आत्मनिर्भर बनाने की प्रेरणा देती जीवनी, राष्ट्रभक्ति गीत एवं कविताओं की माला पिरोया है । आग्रह :आपको पसन्द आये तो ऊर्जा देने के लिए शेयर एवं अपने सुझाव दीजिए ।

शालू सिंह

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