Raktadaan kavita || रक्तदान कविता – कतरा कतरा ख़ून का, जीवन की रसधार

कतरा कतरा ख़ून का, जीवन की रसधार
ख़ून अपना दे कर करो, प्राणों का संचार

रक्त बिना नहिं जी सके, इक दिन भी इन्सान

रक्त से अपने कीजिये, यारों जीवन दान

रक्तदान इक फ़र्ज़ है, रक्तदान इक धर्म

रक्तदान है दोस्तो, सबसे पावन कर्म

मानवता के मंच से, कर दो यह ऐलान

समय समय पर हम सभी, रक्त करेंगे दान

तेरा पंथ युवक परिषद् का पावन अभियान

सत्रह सेप्टेम्बर को हमें , करना है रक्तदान

रक्तदान से रोक लो, मरणासन्न की मौत

घर घर में जलती रहे, सबकी जीवन जोत

धन्य धन्य वह कुल हुआ, धन्य हुआ इन्सान

जो औरों के वास्ते, करता शोणित दान

रक्त कहो, शोणित कहो, लहू कहो या ख़ून

सबका मतलब एक है, जीवन का हनिमून

रक्तदान आसान है, कठिन नहीं है यार

17 -09 के दिन हमें, रहना है तैयार

हँसते हँसते कीजिये, रक्तदान का काम

ताकि दुखियों को मिले, जीवन का आराम

रक्तदान की राह पर, निकला पूरा देश

सारे जग में भेज दो, भारत का सन्देश

ब्लड डोनेशन कीजिये, समय समय पर आप

मन में आये पुण्यता, तन होगा निष्पाप

किसी ज़रूरतमंद को, देकर अपना ख़ून

खूब खिलाओ जगत में, जीवन के परसून

सत्रह सेप्टेम्बर रहे, भैया सबको याद

रक्तदान उत्सव बने, प्रसरेगा आह्लाद

पल दो पल का काम है, रक्तदान श्रीमान

दिनचर्या में आएगा, नहिं तनिक व्यवधान

रक्तदान इक यज्ञ है, मानवता के नाम

आहूति अनमोल है, लगे न कोई दाम

-अलबेला खत्री

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