राष्ट्रोन्नति एक मात्र ध्यान हेच चालु दे
राष्ट्रजीवनात जीव जीवनान्त पाहु दे॥

सोड भोग मोह स्वार्थ देह तुझा झिजो परार्थ
चंदनी सुगंध मंद आसमंत भारु दे॥१॥

ध्येयभाव जो मनात येउ दे तुझ्या कृतीत
कार्याची कीर्तिध्वजा दुरदेशि फुडकु दे॥२॥

कर्मयोग हा ज्वलंत स्वीकारी तू नितांत
दिव्य तुझ्या हवनातुनि दीपमाळ उजळु दे॥३॥

नकोत अन्य यज्ञ याग त्याग हाच मान याग
बंदिवान आत्मतेज आज मुक्त होउ दे॥४॥

rāṣṭronnati eka mātra dhyāna heca cālu de
rāṣṭrajīvanāta jīva jīvanānta pāhu de ||

soḍa bhoga moha svārtha deha tujhā jhijo parārtha
caṁdanī sugaṁdha maṁda āsamaṁta bhāru de ||1||

dhyeyabhāva jo manāta yeu de tujhyā kṛtīta
kāryācī kīrtidhvajā duradeśi phuḍaku de ||2||

kaermayoga hā jvalaṁta svīkārī tū nitāṁta
divya tujhyā havanātuni dīpamāḻa ujaḻu de ||3||

nakota anya yajña yāga tyāga hāca māna yāga
baṁdivāna ātmateja āja mukta hou de ||4||

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मैं एक पत्नी होने के साथ साथ गृहिणी एवं माँ भी हुँ । लिखने का हुनर... ब्लॉग लिखती रहती हु... सनातन ग्रुप एक सकारात्मक ऊर्जा, आत्मनिर्भर बनाने की प्रेरणा देती जीवनी, राष्ट्रभक्ति गीत एवं कविताओं की माला पिरोया है । आग्रह :आपको पसन्द आये तो ऊर्जा देने के लिए शेयर एवं अपने सुझाव दीजिए ।

शालू सिंह

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