थे खेलों लाल गुलाल, होली नित आवे।
थे चलो प्रेम री चाल, होली नित आवे।

कीचड़ माटी थे न उड़ाओं, भेदभाव ने दूर भगाओं।
बणो देश रा लाल, होली नित आवे ।।1।। थे खेलों लाल गुलाल…

प्रेम ज्ञान री भर पिचकारी, होली होली खेलो देश पुजारी।
हो जावैं देश निहाल, होली नित आवे ।।2।। थे खेलों लाल गुलाल….

चन्द्रगुप्त बांको मतवालो, कर्या सिकन्दर को मुंह कालो।
एहड़ी चालो चाल, होली नित आवे ।।3।। थे खेलों लाल गुलाल….

होली खेली लक्ष्मी बाई, गोरा ने बा खड़ग दिखाई।
उठो जवानों आज, होली नित आवे।।4।। थे खेलों लाल गुलाल….

देश पे देणी है कुर्बानी, भगत सिंह का बन अनुगामी।
तरूण, वृद्ध और बाल, होली नित आवे।।5।। थे खेलों लाल गुलाल…

गांव नगर में शाखा लगाओ, सोई हिन्दू शक्ति जगाओं।
अब जननी करे पुकार, होली नित आवे।।6।। थे खेलों लाल गुलाल…

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मैं एक पत्नी होने के साथ साथ गृहिणी एवं माँ भी हुँ । लिखने का हुनर... ब्लॉग लिखती रहती हु... सनातन ग्रुप एक सकारात्मक ऊर्जा, आत्मनिर्भर बनाने की प्रेरणा देती जीवनी, राष्ट्रभक्ति गीत एवं कविताओं की माला पिरोया है । आग्रह :आपको पसन्द आये तो ऊर्जा देने के लिए शेयर एवं अपने सुझाव दीजिए ।

शालू सिंह

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