साधना का दीप ले .. .. ..

साधना का दीप ले निष्कम्प हाथों
बढ रहे निज ध्येय पथ साधक निरंतर ॥ध्रु॥

क्षूद्र भावोंको मिटाने भेद के तम को हटाने
नित्य शाखा संस्कारों को जगा
राष्ट्रभक्ति लीन हो साधक निरंतर॥१॥

को ई पूजा की विधी हो विविध पंथोंकी निधी हो
धर्म का आधार व्यापक है घना
प्रेम वृष्टी कर रहे साधक निरंतर॥२॥

को ई भूखा ना रहेगा कष्ट को ई ना सहेगा
परमवैभव से भरा यह देश हो
बस इसी धुन में लगे साधक निरंतर ॥३॥

मातृभूमी अखण्ड होगी कण्टकोंसे शून्य होगी
संघटित सामर्थ्य की कर गर्जना
जगत को ललकारते साधक निरंतर ॥४॥

sādhanā kā dīpa le niṣkampa hāthoṁ
baḍha rahe nija dhyeya patha sādhaka niraṁtara ||dhru||

kṣūdra bhāvoṁko miṭāne bheda ke tama ko haṭāne
nitya śākhā saṁskāroṁ ko jagā
rāṣṭrabhakti līna ho sādhaka niraṁtara ||1||

ko ī pūjā kī vidhī ho vividha paṁthoṁkī nidhī ho
dharma kā ādhāra vyāpaka hai ghanā
prema vṛṣṭī kara rahe sādhaka niraṁtara ||2||

ko ī bhūkhā nā rahegā kaṣṭa ko ī nā sahegā
paramavaibhava se bharā yaha deśa ho
basa isī dhuna meṁ lage sādhaka niraṁtara ||3||

mātṛbhūmī akhaṇḍa hogī kaṇṭakoṁse śūnya hogī
saṁghaṭita sāmarthya kī kara garjanā
jagata ko lalakārate sādhaka niraṁtara ||4||

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मैं एक पत्नी होने के साथ साथ गृहिणी एवं माँ भी हुँ । लिखने का हुनर... ब्लॉग लिखती रहती हु... सनातन ग्रुप एक सकारात्मक ऊर्जा, आत्मनिर्भर बनाने की प्रेरणा देती जीवनी, राष्ट्रभक्ति गीत एवं कविताओं की माला पिरोया है । आग्रह :आपको पसन्द आये तो ऊर्जा देने के लिए शेयर एवं अपने सुझाव दीजिए ।

शालू सिंह

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