समुद्र मंथन करता घडले अखेर अमृतपान
अविरत अपुल्या परिश्रमातुन होईल राष्ट्रोद्धार

निज स्वताला गाडून घेता वृक्ष डौलदार
दोषा मधल्या तपाराधने फुलपाखरू सुंदर
साधनेतया सतत अंतरी भारतभूचे ध्यान

मातृभूमीच्या सुरेखरुपा सुरात आळवावे
संस्कारांनी सुपुत्र घडवुनी तिजला सजवावे
सत्कर्मांच्या अभिषेकांनी घडवू अमृतस्नान

सहनाववतु मंत्र एकीचा हृदयातुनी गत
नव उन्मेष शालिनी प्रतिमा सर्व दूर प्रकटता
नित्यनूतना हिंदू संस्कृतीत संचरेल नव प्राण

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मैं एक पत्नी होने के साथ साथ गृहिणी एवं माँ भी हुँ । लिखने का हुनर... ब्लॉग लिखती रहती हु... सनातन ग्रुप एक सकारात्मक ऊर्जा, आत्मनिर्भर बनाने की प्रेरणा देती जीवनी, राष्ट्रभक्ति गीत एवं कविताओं की माला पिरोया है । आग्रह :आपको पसन्द आये तो ऊर्जा देने के लिए शेयर एवं अपने सुझाव दीजिए ।

शालू सिंह

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