श्री सूर्यमंडल अष्टक स्तोत्रम् || Shri Surya Mandala Ashtakam Stotram

यह तो आप सब पहले से जानते हो की हमारे हिन्दू धर्म में सूर्य देव मुख्य देवताओं में से एक है ! श्री सूर्यमंडल अष्टक स्तोत्रम् संस्कृत भाषा में लिखा हुआ हैं ! श्री सूर्यमंडल अष्टक स्तोत्रम् नियमित रूप से पाठ करने से भगवान सूर्य देव का आशीर्वाद बना रहता हैं ! श्री सूर्यमंडल अष्टक स्तोत्रम् का जाप करने से व्यक्ति को यश की प्राप्ति, नकारात्मकता विचार समाप्त हो जाना, रोग, सभी पाप नष्ट हो जाते हैं ! और जातक मुत्यु के बाद सूर्य लोग में जाता हैं |

सूर्यमंडल अष्टक स्तोत्रम् || Surya Mandala Ashtakam Stotram || Surya Mandala Ashtakam Stotra

नमः सवित्रे जगदेकचक्षुषे जगत्प्रसूतिस्थितिनाश हेतवे ।

त्रयीमयाय त्रिगुणात्मधारिणे विरञ्चि नारायण शंकरात्मने ॥ १ ॥

यन्मडलं दीप्तिकरं विशालं रत्नप्रभं तीव्रमनादिरुपम् ।

दारिद्र्यदुःखक्षयकारणं च पुनातु मां तत्सवितुर्वरेण्यम् ॥ २ ॥

यन्मण्डलं देवगणै: सुपूजितं विप्रैः स्तुत्यं भावमुक्तिकोविदम् ।

तं देवदेवं प्रणमामि सूर्यं पुनातु मां तत्सवितुर्वरेण्यम् ॥ ३ ॥

यन्मण्डलं ज्ञानघनं, त्वगम्यं, त्रैलोक्यपूज्यं, त्रिगुणात्मरुपम् ।

समस्ततेजोमयदिव्यरुपं पुनातु मां तत्सवितुर्वरेण्यम् ॥ ४ ॥

यन्मडलं गूढमतिप्रबोधं धर्मस्य वृद्धिं कुरुते जनानाम् ।

यत्सर्वपापक्षयकारणं च पुनातु मां तत्सवितुर्वरेण्यम् ॥ ५ ॥

यन्मडलं व्याधिविनाशदक्षं यदृग्यजु: सामसु सम्प्रगीतम् ।

प्रकाशितं येन च भुर्भुव: स्व: पुनातु मां तत्सवितुर्वरेण्यम् ॥ ६ ॥

यन्मडलं वेदविदो वदन्ति गायन्ति यच्चारणसिद्धसंघाः ।

यद्योगितो योगजुषां च संघाः पुनातु मां तत्सवितुर्वरेण्यम् ॥ ७ ॥

यन्मडलं सर्वजनेषु पूजितं ज्योतिश्च कुर्यादिह मर्त्यलोके ।

यत्कालकल्पक्षयकारणं च पुनातु मां तत्सवितुर्वरेण्यम् ॥ ८ ॥

यन्मडलं विश्वसृजां प्रसिद्धमुत्पत्तिरक्षाप्रलयप्रगल्भम् ।

यस्मिन् जगत् संहरतेऽखिलं च पुनातु मां तत्सवितुर्वरेण्यम् ॥ ९ ॥

यन्मडलं सर्वगतस्य विष्णोरात्मा परं धाम विशुद्ध तत्त्वम् ।

सूक्ष्मान्तरैर्योगपथानुगम्यं पुनातु मां तत्सवितुर्वरेण्यम् ॥ १० ॥

यन्मडलं वेदविदि वदन्ति गायन्ति यच्चारणसिद्धसंघाः ।

यन्मण्डलं वेदविदः स्मरन्ति पुनातु मां तत्सवितुर्वरेण्यम् ॥ ११ ॥

यन्मडलं वेदविदोपगीतं यद्योगिनां योगपथानुगम्यम् ।

तत्सर्ववेदं प्रणमामि सूर्य पुनातु मां तत्सवितुर्वरेण्यम् ॥ १२ ॥

मण्डलात्मकमिदं पुण्यं यः पठेत् सततं नरः ।

सर्वपापविशुद्धात्मा सूर्यलोके महीयते ॥ १३ ॥

॥ इति श्रीमदादित्यहृदये मण्डलात्मकं स्तोत्रं संपूर्णम् ॥

|| Shri Surya Mandala Ashtakam Stotram ||

Namostu Suryaya Sahasrarasmaye Sahasrasakhanvitasambhavatmane

Sahasrayogodbhavabhavabhagine Sahasrasankhyayugadharine Namah || 1 ||

Yanmandalam deepthikaram visalam,

Rathnaprabham theevramanadhi roopam,

Daridrya dukha kshaya karanam cha,

Punathu maam That savithur varenyam. || 2 ||

Yanmandalam devaganai supoojitham,

Viprai sthutham, bhavana mukthi kovidam,

Tham deva devam pranamami sooryam,

Punathu maam That savithur varenyam. || 3 ||

Yanmandalm jnanaganam thwagamyam,

Trilokhya poojyam trigunathma roopam,

Samastha thejo maya divya roopam,

Punathu maam That savithur varenyam. || 4 ||

Yanmandalam gudamathi prabodham,

Dharmasya vrudhim kuruthe jananaam,

Yath sarva papa kshaya karanam cha,

Punathu maam That savithur varenyam. || 5 ||

Yanmandalam vyadhi vinasa daksham,

Yadrug yaju sama su samprageetham,

Prakasitham yena cha bhoorbhuvaswa,

Punathu maam That savithur varenyam. || 6 ||

Yanmandalam veda vido vadanthi,

Gayanthi yascharana sidha sangha,

Yad yogino yoga jusham cha sangha,

Punathu maam That savithur varenyam. || 7 ||

Yanmandalam sarva janeshu poojitham,

Jyothischa kuryadiha marthya loke,

Yath kala kalpa kshaya karanam cha,

Punathu maam That savithur varenyam. || 8 ||

Yanmandalam viswa srujaam prasidham ,

Uthpathi raksha pralaya prgathbham,

Yasmin jagath samharethe akhilam cha,

Punathu maam That savithur varenyam. || 9 ||

Yanmandalam sarva jagathasya vishno,

Athmaa param dhama vishudha thathwam,

Sookshmantharai yoga padanugamyam,

Punathu maam That savithur varenyam. || 10 ||

Yanmandalm Veda padhopageetham,

Yad yoginaam yoga padhanu gamyam,

Thath sarva vedam pranamami suryam,

Punathu maam That savithur varenyam. || 11 ||

Phala Sruthi

Mandalashtakam idham punyam yath padeth sathathan nara,

Sarva papa vishudhatma, suya loke maheeyathe.

श्री सूर्यमंडल अष्टक स्तोत्रम् के लाभ / फ़ायदे || Shri Surya Mandala Ashtakam Stotram Ke Labh / Fayde

  • जिस भी जातक के नकारात्मक विचार आते रहते हैं उन्हें नित्य श्री सूर्यमंडल अष्टक स्तोत्रम् का पाठ करना विशेष रूप से लाभकारी रहता हैं।
  • यदि आपको आपकी मेहनत के अनुरूप मान सम्मान या यश की प्राप्ति नहीं हो रही हैं तो श्री सूर्यमंडल अष्टक स्तोत्रम् का पाठ करने से आपकी यह समस्या दूर हो जाएगी।
  • जो भी जातक श्री सूर्यमंडल अष्टक स्तोत्रम् का रोजाना पाठ करता हैं उसे मृत्यु के बाद मोक्ष की प्राप्ति होती हैं।
  • सूर्य ग्रह की महादशा और अंतर्दशा आपके लिए विपरीत चल रही है तो श्री सूर्यमंडल अष्टक स्तोत्रम् का पाठ करना आपके लिए लाभदायक रह सकता हैं।
  • श्री सूर्यमंडल अष्टक स्तोत्रम् का पाठ सूर्य ग्रह के बुरे गोचर के समय करना भी जातक को फायदेमद रहता हैं।
  • यदि आपके जीवन में सूर्य ग्रह से संबधित कोई रोग या बीमारी हो रही हो तो श्री सूर्यमंडल अष्टक स्तोत्रम् का पाठ उस समय जरूर करना चाहिए।
  • जातक की कुंडली अनुसार सूर्य ग्रह मारकेश हो और आपके जीवन में गुरु ग्रह प्रभावित कर रहा हो तो भी श्री सूर्यमंडल अष्टक स्तोत्रम् का पाठ करना आपको बहुत ज्यादा लाभ दे सकता हैं।
  • यदि आप अपने जीवन में सूर्य ग्रह से होने वाले नुकसान या बुरे प्रभाव से किसी भी तरह से ग्रस्त चल रहे हो तो भी श्री सूर्यमंडल अष्टक स्तोत्रम् का पाठ करने से आपके जीवन में सुधार देखने को जरूर मिलेगा।
  • श्री सूर्यमंडल अष्टक स्तोत्रम् का रोजाना पाठ पाठ करने से सूर्य ग्रह को मजबूत बनाया जा सकता हैं।
  • यदि कुंडली में सूर्य ग्रह अशुभ प्रभाव दे रहा हो तो भी रोजाना श्री सूर्यमंडल अष्टक स्तोत्रम् का पाठ करने से सूर्य ग्रह की शांति की जा सकती हैं।
  • जिन जातकों की जन्म कुंडली में सूर्य ग्रह निर्बल अवस्था या पाप ग्रह से ग्रस्त से प्रभावित है तो श्री सूर्यमंडल अष्टक स्तोत्रम् का नित्य पाठ करना आपको फायदा पहुँचा सकता हैं।
  • सूर्य देव की नित्य पूजा पाठ में श्री सूर्यमंडल अष्टक स्तोत्रम् का पाठ करने से श्री सूर्य देव की कृपा बनी रहती हैं।

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