भगवान ब्रह्मा सृष्टि के रचयिता व सृजनकर्ता है प्रस्तुत जगन्मङ्गल नामक श्रीब्रह्मकवचम् के पाठ से जगत में व पाठक के जीवन में खुशियों का सृजन होता है।

श्रीब्रह्मकवचम्

ॐ श्रीब्रह्मणे नमः ।

कवचं श्रृणु चार्वङ्गि जगन्मङ्गलनामकम् ।

पठनाद्धारणाद्यस्य ब्रह्मज्ञो जायते ध्रुवम् ॥ १॥

परमात्मा शिरः पातु हृदयं परमेश्वरः ।

कण्ठं पातु जगत्त्राता वदनं सर्वदृग्विभुः ॥ २॥

करौ मे पातु विश्वात्मा पादौ रक्षतु चिन्मयः ।

सर्वाङ्गं सर्वदा पातु परब्रह्म सनातनम् ॥ ३॥

श्रीजगन्मङ्गलस्यास्य कवचस्य सदाशिवः ।

ऋषिश्छन्दोऽनुष्टुबिति परब्रह्म च देवता ॥ ४॥

चतुर्वर्गफलावाप्त्यै विनियोगः प्रकीर्तितः ।

यः पठेद्ब्रह्मकवचं ऋषिन्यासपुरःसरम् ॥ ५॥

स ब्रह्मज्ञानमासाद्य साक्षाद्ब्रह्ममयो भवेत् ।

भूर्जे विलिख्य गुटिकां स्वर्णस्थां धारायेद्यदि ॥ ६॥

कण्ठे वा दक्षिणे बाहौ सर्वसिद्धीश्वरो भवेत् ।

इत्येतत् परमं ब्रह्मकवचं ते प्रकाशितम् ॥ ७॥

दद्यात् प्रियाय शिष्याय गुरुभक्ताय धीमते ।

पठित्वा स्तोत्रकवचं प्रणमेत्साधकाग्रणीः ॥ ८॥

ॐ नमस्ते परमं ब्रह्म नमस्ते परमात्मने ।

निर्गुणाय नमस्तुभ्यं सद्रूपाय नमो नमः ॥ ९॥

ॐ श्रीब्रह्मणे नमः ।

ॐ श्रीब्रह्मणे नमः ।

ॐ श्रीब्रह्मणे नमः ।

॥ इति श्रीब्रह्मकवचं सम्पूर्णम् ॥

मैं एक पत्नी होने के साथ साथ गृहिणी एवं माँ भी हुँ । लिखने का हुनर... ब्लॉग लिखती रहती हु... सनातन ग्रुप एक सकारात्मक ऊर्जा, आत्मनिर्भर बनाने की प्रेरणा देती जीवनी, राष्ट्रभक्ति गीत एवं कविताओं की माला पिरोया है । आग्रह :आपको पसन्द आये तो ऊर्जा देने के लिए शेयर एवं अपने सुझाव दीजिए ।

शालू सिंह

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