स्वर्णमयी लंका न मिले माँ, अवधपुरी की धूल मिले |
सोने में कांटे चुभते हैं, मिट्टी में हैं फूल खिले ||

इन्द्रासन वैभव नहीं प्यारा, माता की गोदी प्यारी,
नमो-नमो जग जननी माता, कण-कण पर सुत बलिहारी,
पुष्पों की शय्या न मिले माँ, कदम-कदम पर शूल में ||१||

सोने में कांटे चुभते हैं………………………..
तेरा सुख सर्वस्व हमारा, तेरा दुःख आह्वान बने,
तेरी शान बढाते जाएं, मृत्यु विजय की शान बने |
आजीवन पतवार चलाएं, धार मिले या कूल मिले ||२||

सोने में कांटे चुभते हैं………………………..
नयनों में ज्योतित रहना माँ, सिर पर वर का कर धरना माँ,
रग-रग में जीवन भरना माँ, तुम्ही प्रेरणा का झरना माँ,
जीवन भक्ति समर्पित हो नित, अमृत रस में मूल मिले ||३||
सोने में कांटे चुभते हैं………………………..

स्वर्णमयी लंका न मिले माँ, अवधपुरी की धूल मिले |
सोने में कांटे चुभते हैं, मिट्टी में हैं फूल खिले ||

मैं एक पत्नी होने के साथ साथ गृहिणी एवं माँ भी हुँ । लिखने का हुनर... ब्लॉग लिखती रहती हु... सनातन ग्रुप एक सकारात्मक ऊर्जा, आत्मनिर्भर बनाने की प्रेरणा देती जीवनी, राष्ट्रभक्ति गीत एवं कविताओं की माला पिरोया है । आग्रह :आपको पसन्द आये तो ऊर्जा देने के लिए शेयर एवं अपने सुझाव दीजिए ।

शालू सिंह

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