आया वसंत आया वसंत – सोहनलाल द्विवेदी

आया वसंत आया वसंत
छाई जग में शोभा अनंत

सरसों खेतों में उठी फूल
बौरें आमों में उठीं झूल
बेलों में फूले नये फूल
पल में पतझड़ का हुआ अंत
आया वसंत आया वसंत

ले कर सुगंध बह रही पवन
हरियाली छाई है बन बन
सुंदर लगता है घर आँगन
है आज मधुर सब दिग् दिगंत
आया वसंत आया वसंत

भौंरे गाते हैं नया गान
कोकिला छेड़ती कुहू तान
है सब जीवों के सुखी प्राण
इस सुख का हो अब नहीं अंत
आया वसंत आया वसंत

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