जय सुखकरणी सब दुःखहरणी जयति जयति जय भारत माता।
तेरी गोदी में पलने हित आया करते स्वयं विधाता॥
॥जयति जयति ॥

तेरे कण-कण तृण-तृण में त्याग तपस्या का संगम है।
साहस शौर्य आत्माहुति का तेरी धरती ही उद्गम है।
वेदों के पावन वाणी के सत्य-धर्म के चिर उद्गाता॥
॥जयति जयति ॥

मानव ही क्या प्राणि मात्र की तेरे अंतर में ममता है।
गंगा के जअ बिंदु-बिंदु में पाप् निवारण की क्षमता है।
तेरी अमर संस्कृति को जग है श्रद्घा से शीश नवता॥
॥जयति जयति ॥

लिखी हु हल्दी घाटी में गौरवमयी परिपाटी।
रजपूती वीरों ने जिसकी धरती अरि शीशों से पाटी।
उन वीरों के पराक्रमों के मुक्त पवन निशि दिन गुण गाता॥
॥जयति जयति ॥

धरती में हम हिंदुजनों की तेरी उन्नति में उन्नति है।
तेरी शोभा में शोभा है तेरी अवनति में अवनति है।
तेरा और हमारा है माँ जैसे देह-प्राण का नाता॥
॥जयति जयति ॥

jaya sukhakaraṇī saba duaḥkhaharaṇī jayati jayati jaya bhārata mātā|
terī godī meṁ palane hita āyā karate svayaṁ vidhātā||
|jayati jayati ||

tere kaṇa-kaṇa tṛṇa-tṛṇa meṁ tyāga tapasyā kā saṁgama hai|
sāhasa śaurya ātmāhuti kā terī dharatī hī udgama hai|
vedoṁ ke pāvana vāṇī ke satya-dharma ke cira udgātā||
|jayati jayati ||

mānava hī kyā prāṇi mātra kī tere aṁtara meṁ mamatā hai |
gaṁgā ke jaa biṁdu-biṁdu meṁ pāp nivāraṇa kī kṣamatā hai |
terī amara saṁskṛti ko jaga hai śradghā se śīśa navatā ||
|jayati jayati ||

likhī huī haldī ghāṭī meṁ gauravamayī paripāṭī |
rajapūtī vīroṁ ne jisakī dharatī ari śīśoṁ se pāṭī |
una vīroṁ ke parākramoṁ ke mukta pavana niśi dina guṇa gātā ||
|jayati jayati ||

dharatī meṁ hama hiṁdujanoṁ kī terī unnati meṁ unnati hai |
terī śobhā meṁ śobhā hai terī avanati meṁ avanati hai |
terā aura hamārā hai mā jaise deha-prāṇa kā nātā ||
|jayati jayati ||

, , , , , , , , , , , ,

मैं एक पत्नी होने के साथ साथ गृहिणी एवं माँ भी हुँ । लिखने का हुनर... ब्लॉग लिखती रहती हु... सनातन ग्रुप एक सकारात्मक ऊर्जा, आत्मनिर्भर बनाने की प्रेरणा देती जीवनी, राष्ट्रभक्ति गीत एवं कविताओं की माला पिरोया है । आग्रह :आपको पसन्द आये तो ऊर्जा देने के लिए शेयर एवं अपने सुझाव दीजिए ।

शालू सिंह

🙏 सकारात्मक जानकारी को फेसबुक पर पाने के लिए लाइक करें 👇

Leave a Reply