कहां ढूंढें नदी सा बहता हुआ दिन

वह गगन भर धूप‚ सेनुर और सोना
धार का दरपन‚ भंवर का फूल होना

हां किनारों से कथा कहता हुआ दिन।

सूर्य का हर रोज नंगे पांव चलना
घाटियों में हवा का कपड़े बदलना

ओस‚ कोहरा‚ घाम सब सहता हुआ दिन।

कौन देगा मोरपंखों से लिखे छन
रेतियों पर सीप शंखों से लिखे छन

आज कच्ची भीत सा ढहता हुआ दिन।

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मैं एक पत्नी होने के साथ साथ गृहिणी एवं माँ भी हुँ । लिखने का हुनर... ब्लॉग लिखती रहती हु... सनातन ग्रुप एक सकारात्मक ऊर्जा, आत्मनिर्भर बनाने की प्रेरणा देती जीवनी, राष्ट्रभक्ति गीत एवं कविताओं की माला पिरोया है । आग्रह :आपको पसन्द आये तो ऊर्जा देने के लिए शेयर एवं अपने सुझाव दीजिए ।

शालू सिंह

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