हो गई है पीर पर्वत सी पिघलनी चहिए‚
इस हिमालय से कोई गंगा निकलनी चाहिये।

आज यह दीवार‚ परदों की तरह हिलने लगी‚
शर्त लेकिन थी कि यह बुनियाद हिलनी चाहिए।

हर सड़क पर‚ हर गली में‚ हर नगर‚ हर गांव में‚
हाथ लहराते हुए हर लाश चलनी चाहिए।

सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं‚
मेरी कोशिश है कि ये सूरत बदलनी चाहिए।

मेरे सीने में नहीं तो तेरे सीने में सही‚
हो कहीं भी आग लेकिन आग जलनी चाहिए।

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मैं एक पत्नी होने के साथ साथ गृहिणी एवं माँ भी हुँ । लिखने का हुनर... ब्लॉग लिखती रहती हु... सनातन ग्रुप एक सकारात्मक ऊर्जा, आत्मनिर्भर बनाने की प्रेरणा देती जीवनी, राष्ट्रभक्ति गीत एवं कविताओं की माला पिरोया है । आग्रह :आपको पसन्द आये तो ऊर्जा देने के लिए शेयर एवं अपने सुझाव दीजिए ।

शालू सिंह

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