आज तन मन और जीवन
धन सभी कुछ हो समपर्ण
राष्ट्र्‌हित की साधना में, हम करें सर्वस्व अपर्ण………………।…।
धृत्यागकर हम शेष जीवनकी, सुसंचित कामनायें
ध्येय के अनुरूप जीवन, हम सभी अपना बनायें
पूणर् विकसित शुध्द जीवन-पुष्प से हो राष्ट्र्‌ अर्चन……।। १यज्ञ हित हो पूणर् आहुति, व्यक्तिगत संसार स्वाहा
देश के कल्याण में हो, अतुल धन भंडार स्वाहा
कर सके विचलित न किंचित मोहके ये कठिन बंधन……………। २हो रहा आह्‌वान तो फिर, कौन असमंजस हमें है
ऊच्यतर आदशर् पावन प्राप्त युग युग से हमें है
हम ग्रहण कर लें पुन: वह त्यागमय परिपूणर् जीवन………।……३

Aja tana mana aura jIvana

Aja tana mana aura jIvana
dhana saBI kuCa ho samaparNa
rAShTr^^hita kI sAdhanA meM, hama kareM sarvasva aparNa………………|…|dhRu

tyAgakara hama SeSha jIvanakI, susaMcita kAmanAyeM
dhyeya ke anurUpa jIvana, hama saBI apanA banAyeM
pUNar vikasita Sudhda jIvana-puShpa se ho rAShTr^^ arcana……||1

yaj~ja hita ho pUNar Ahuti, vyaktigata saMsAra svAhA
deSa ke kalyANa meM ho, atula dhana BaMDAra svAhA
kara sake vicalita na kiMcita mohake ye kaThina baMdhana……………| 2

ho rahA Ah^^vAna to Pira, kauna asamaMjasa hameM hai
Ucyatara AdaSar pAvana prApta yuga yuga se hameM hai
hama grahaNa kara leM puna: vaha tyAgamaya paripUNar jIvana………|……3

, , , , , , , , , , , ,

मैं एक पत्नी होने के साथ साथ गृहिणी एवं माँ भी हुँ । लिखने का हुनर... ब्लॉग लिखती रहती हु... सनातन ग्रुप एक सकारात्मक ऊर्जा, आत्मनिर्भर बनाने की प्रेरणा देती जीवनी, राष्ट्रभक्ति गीत एवं कविताओं की माला पिरोया है । आग्रह :आपको पसन्द आये तो ऊर्जा देने के लिए शेयर एवं अपने सुझाव दीजिए ।

शालू सिंह

🙏 सकारात्मक जानकारी को फेसबुक पर पाने के लिए लाइक करें 👇

Leave a Reply