अनेकता में ऐक्य मंत्र को,
जन-जन फिर अपनाता है।
धीरे-धीरे देश हमारा,
आगे बढता जाता है।

इस धरती को स्वर्ग बनाया,
ॠषियों ने देकर बलिदान॥
उन्हीं के वंशज आज चले फिर,
करने को इसका निर्माण।
कर्म पंथ पर आज सभी को गीता ग्यान बुलाता है॥1॥

जाति, प्रान्त और वर्ग भेद के,
भ्रम को दूर भगाना है।
भूख, बीमारी और बेकारी, इनको आज मिटाना है।
एक देश का भाव जगा दें, सबकी भारत माता है॥2॥

हमें किसी से बैर नहीं है,
हमें किसी से भीति नहीं।
सभी से मिलकर काम करेंगे,
संगठना की रीति यही।
नील गगन पर भगवा ध्वज यह, लहर लहर लहराता है॥3॥

aneka mem eky maatr ko,
jan-jan peera apaan at hai|
dheere-dheere desa hamaara,
umr badha jaat hai|

isa dharatee ko svarg banaaya,
rushiyom ne dekaara baalidaan ||
unahim ke vaamasaaja aaj kaale peera,
karane ko isaaka nirmaan|
karm pamtha para aaj sabee ko geeta gyaan bulaata hai ||

jaati, praant aur varg beda ke,
brama ko door baagaan hai|
buka, bimaaree aura bekaree, inako aaj mitaana hai|
ek desa ka baav jag dem, sabakee baarata maata hai ||

ham kis se baira nahin hai,
ham kisee se bitee nahin|
sabee se milaakar kaam karenge,
sahayog thaana kee rti yaahi| .
neel gagan para bagava dhvaj yah, lahar lahara at hai ||

मैं एक पत्नी होने के साथ साथ गृहिणी एवं माँ भी हुँ । लिखने का हुनर... ब्लॉग लिखती रहती हु... सनातन ग्रुप एक सकारात्मक ऊर्जा, आत्मनिर्भर बनाने की प्रेरणा देती जीवनी, राष्ट्रभक्ति गीत एवं कविताओं की माला पिरोया है । आग्रह :आपको पसन्द आये तो ऊर्जा देने के लिए शेयर एवं अपने सुझाव दीजिए ।

शालू सिंह

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