चल तू अपनी राह पथिक चल
होने दे होता है जो कुछ
उस होने ना होने से क्या
तुझको तुझको तुझको
विजय पराजय से क्या ||धृ||

मेघ उमड़ते हैं – अम्बर में
भँवर उठ रहे है – सागर में
आँधी और तूफान डगर में
तुझको तो केवल चलाना है
चलाना ही है तो फिर डर क्या
तुझको तुझको तुझको
विजय पराजय से क्या ||१||

अरे थक गया क्यूँ – बढ़ता चल
उठ संघर्षोंसे – लड़ता चल
जीवन विषम पंथ चलता चल
खड़ा हिमालय हो यदि आगे
चढु या लौटू यह संशय क्यों
तुझको तुझको तुझको
विजय पराजय से क्या ||२||

Anonymous | Aug 1 2012 – 21:39

चल तू अपनी राह पथिक चल
होने दे होता है जो कुछ
उस होने ना होने से क्या
तुझको तुझको तुझको
विजय पराजय से क्या ||धृ||
मेघ उमड़ते हैं – अम्बर में
भँवर उठ रहे है – सागर में
आँधी और तूफान डगर में
तुझको तो केवल चलाना है
चलाना ही है तो फिर डर क्या
तुझको तुझको तुझको
विजय पराजय से क्या ||१||

, , , , , , , , , , , ,

मैं एक पत्नी होने के साथ साथ गृहिणी एवं माँ भी हुँ । लिखने का हुनर... ब्लॉग लिखती रहती हु... सनातन ग्रुप एक सकारात्मक ऊर्जा, आत्मनिर्भर बनाने की प्रेरणा देती जीवनी, राष्ट्रभक्ति गीत एवं कविताओं की माला पिरोया है । आग्रह :आपको पसन्द आये तो ऊर्जा देने के लिए शेयर एवं अपने सुझाव दीजिए ।

शालू सिंह

🙏 सकारात्मक जानकारी को फेसबुक पर पाने के लिए लाइक करें 👇

Leave a Reply