हिन्दु महोदधि से हिमगिरि तक विस्तृत भारत सारा
ऋषि मुनियों का तपस्वियों प्राणों से भी प्यारा

उत्तर में नगराज नगराज सुशोभित
दक्षिण में सागर लहराता।
पुरब पश्चिम करें आरती
मलयानिल शीतलता लाता।
गंगा यमुना सिन्धु नर्मदा ने है जिसे संवारा॥१॥

जहाँ पद्मिनी सती हुई थी
जन्मी अनुसुइया और सीता।
महावीर नानक गौतम औ
शंकर की यह धरा पुनिता।
जहाँ कृष्ण ने ग्वाल बाल संग गोवर्धन था धारा॥२॥

जिसने दिया विश्व को समता
स्नेह और बन्धुत्व भावना।
जन-जन सुखी दूखी नहिं कोई।
जड़ चेतन हो पूर्ण कामना।
सर्वे भवन्तु सुखिनः जीवन का आदर्श हमारा॥३॥

hindu mahodadhi se himagiri taka vistṛta bhārata sārā
ṛṣi muniyoṁ kā tapasviyoṁ prāṇoṁ se bhī pyārā

uttara meṁ nagarāja nagarāja suśobhita
dakṣiṇa meṁ sāgara laharātā|
puraba paścima kareṁ āratī
malayānila śītalatā lātā|
gaṁgā yamunā sindhu narmadā ne hai jise saṁvārā||1||

jahā padminī satī huī thī
janmī anusuiyā aura sītā |
mahāvīra nānaka gautama au
śaṁkara kī yaha dharā punitā |
jahā kṛṣṇa ne gvāla bāla saṁga govardhana thā dhārā ||2||

jisane diyā viśva ko samatā
sneha aura bandhutva bhāvanā |
jana-jana sukhī dūkhī nahiṁ koī |
jaṛa cetana hoa pūrṇa kāmanā |
sarve bhavantu sukhinaḥ jīvana kā ādarśa hamārā||3||

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मैं एक पत्नी होने के साथ साथ गृहिणी एवं माँ भी हुँ । लिखने का हुनर... ब्लॉग लिखती रहती हु... सनातन ग्रुप एक सकारात्मक ऊर्जा, आत्मनिर्भर बनाने की प्रेरणा देती जीवनी, राष्ट्रभक्ति गीत एवं कविताओं की माला पिरोया है । आग्रह :आपको पसन्द आये तो ऊर्जा देने के लिए शेयर एवं अपने सुझाव दीजिए ।

शालू सिंह

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