जन्म-भूमि मातृ-भूमि पितृ-भूमि वन्दना
रामभूमि त्यागभूमि भाग्यभूमि अर्चना॥

विश्व में उठा हिमाद्रि का विशाल भाल है
सिन्धु ब्रह्मपुत्र गंगाधार कण्ठ-माल है
है समुद्र धो रहा सदैव पाँव चूमता
फूल है चढ़ा सुगन्ध पा समीर झूमता
चाँदनी हँसी मिली
वायु प्राण सी खिली
हैं तुझे निहार स्वर्ग की
समस्त कल्पना॥जन्मभूमि०॥

धाम मेंहधार शीत और हेमवन्त है
पत्र झाड फूल गूँथता हुआ बसन्त है
है गम्भीर गर्जना कभी सरस फुहार है
चंचल चमक कभी सुरम्य इन्द्रहार है
आरती उतारती
वेश को संवारती
मूर्तिमान हो गई
जहाँ स्वरुप कामना॥जन्मभूमि०॥

देश में अनेक वर्ग-वर्ण जाति धर्म हैं
भाव हैं अनेक बोल हैं अनेक कर्म हैं
कोटि-कोटि रुप में परन्तु एक प्राण है
मान एक ज्ञान एक ध्यान एक गान है
आल एक शक्ति है
एक भाव भक्ति है
कोटि-कोटि प्राण की
अभिन्न आज भावना॥जन्मभूमि०॥

आज लक्ष-लक्ष का जिसे बाहुबल मिला
कौन कह रहा कि वीर भूमि आज निर्बला
आज जागरण हु कि हम सदा स्वतन्र हैं
आज लोक के स्वीकार तन्त्र मन्त्र यन्त्र हैं
आज एक कल्पना
आज एक चिन्तना
आज अर्चन यही
समस्त सिद्घि साधना॥जन्मभूमि०॥

janma-bhūmi mātṛ-bhūmi pitṛ-bhūmi vandanā
rāmabhūmi tyāgabhūmi bhāgyabhūmi arcanā||

viśva meṁ uṭhā himādri kā viśāla bhāla hai
sindhu brahmaputra gaṁgādhāra kaṇṭha-māla hai
hai samudra dho rahā sadaiva pāva cūmatā
phūla hai caṛhā sugandha pā samīra jhūmatā
cādanī hasī milī
vāyu prāṇa sī khilī
haiṁ tujhe nihāra svarga kī
samasta kalpanā|janmabhūmi0||

dhāma meṁhadhāra śīta aura hemavanta hai
patra jhāḍa phūla gūthatā huaā basanta hai
hai gambhīra garjanā kabhī sarasa phuhāra hai
caṁcala camaka kabhī suramya indrahāra hai
āratī utāratī
veśa ko saṁvāratī
mūrtimāna ho gaī
jahā svarupa kāmanā|janmabhūmi0||

deśa meṁ aneka varga-varṇa jāti dharma haiṁ
bhāva haiṁ aneka bola haiṁ aneka karma haiṁ
koṭi-koṭi rupa meṁ parantu eka prāṇa hai
māna eka jñāna eka dhyāna eka gāna hai
āla eka śakti hai
eka bhāva bhakti hai
koṭi-koṭi prāṇa kī
abhinna āja bhāvanā|janmabhūmi0||

āja lakṣa-lakṣa kā jise bāhubala milā
kauna kaha rahā ki vīra bhūmi āja nirbalā
āja jāgaraṇa huā ki hama sadā svatanra haiṁ
āja loka ke svīkāra tantra mantra yantra haiṁ
āja eka kalpanā
āja eka cintanā
āja arcana yahī
samasta sidghi sādhanā|janmabhūmi0||

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मैं एक पत्नी होने के साथ साथ गृहिणी एवं माँ भी हुँ । लिखने का हुनर... ब्लॉग लिखती रहती हु... सनातन ग्रुप एक सकारात्मक ऊर्जा, आत्मनिर्भर बनाने की प्रेरणा देती जीवनी, राष्ट्रभक्ति गीत एवं कविताओं की माला पिरोया है । आग्रह :आपको पसन्द आये तो ऊर्जा देने के लिए शेयर एवं अपने सुझाव दीजिए ।

शालू सिंह

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