मनसा सततम् स्मरणीयम्
वचसा सततम् वदनीयम्
लोकहितम् मम करणीयम् ॥धृ॥

न भोग भवने रमणीयम्
न च सुख शयने शयनीयम्
अहर्निशम् जागरणीयम्
लोकहितम् मम करणीयम् ॥१॥

न जातु दुःखम् गणनीयम्
न च निज सौख्यम् मननीयम्
कार्य क्षेत्रे त्वरणीयम्
लोकहितम् मम करणीयम् ॥२॥

दुःख सागरे तरणीयम्
कष्ट पर्वते चरणीयम्
विपत्ति विपिने भ्रमणीयम्
लोकहितम् मम करणीयम् ॥३॥

गहनारण्ये घनान्धकारे
बन्धु जना ये स्थिता गह्वरे
तत्र मया सन्चरणीयम्
लोकहितम् मम करणीयम् ॥४॥

English Transliteration:
manasā satatam smaraṇīyam
vacasā satatam vadanīyam
lokahitam mama karaṇīyam ||dhṛ||

na bhoga bhavane ramaṇīyam
na ca sukha śayane śayanīyam
aharniśam jāgaraṇīyam
lokahitam mama karaṇīyam ||1||

na jātu duaḥkham gaṇanīyam
na ca nija saukhyam mananīyam
kārya kṣetre tvaraṇīyam
lokahitam mama karaṇīyam ||2||

duaḥkha sāgare taraṇīyam
kaṣṭa parvate caraṇīyam
vipatti vipine bhramaṇīyam
lokahitam mama karaṇīyam ||3||

gahanāraṇye ghanāndhakāre
bandhu janā ye sthitā gahvare
tatra mayā sancaraṇīyam
lokahitam mama karaṇīyam ||4||

Translation:
Let us always remember,
Let us repeatedly speak out:
Our duty is to do good to humanity.

Let us not focus on material pleasures
Nor lay in the lap of luxury;
Let us be awakened always that
Our duty is to do good to humanity.

Let us not enumerate our sorrows
Nor constantly reflect on our happiness
Let us step up to take action:
Our duty is to do good to humanity.

Let us sail over oceans of misery,
Let us scale mountains of difficulty.
While roaming through the jungle of adversity,
Our duty is to do good to humanity.

Be it a dense forest of extreme darkness
Or surrounded by kith and kin
When we travel these paths,
Our duty remains – to do good to humanity.

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मैं एक पत्नी होने के साथ साथ गृहिणी एवं माँ भी हुँ । लिखने का हुनर... ब्लॉग लिखती रहती हु... सनातन ग्रुप एक सकारात्मक ऊर्जा, आत्मनिर्भर बनाने की प्रेरणा देती जीवनी, राष्ट्रभक्ति गीत एवं कविताओं की माला पिरोया है । आग्रह :आपको पसन्द आये तो ऊर्जा देने के लिए शेयर एवं अपने सुझाव दीजिए ।

शालू सिंह

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