मंगल दीप न बुझने पाए।
प्रबल थपेड़े खाकर उर की लौ तनिक डिग जाए
पथ से पग न कही हट जाए॥

अट्टहास कर उठे प्रभञ्जन घिरे प्रलय का घेरा
बन दावानल घर में छाया हो घनघोर अँधेरा
पथ प्रशस्त करने तब नभ में विद्युत्छवि लहराएँ
अमृत ज्योति नघटने पाये॥१॥

गिरे गाज या मन में पड़ते हों जलते अंगारे
दमन -चक्र का प्रण ले धायें सूरज चाँद सितारे
किन्तु सत्य का पथिक अकम्पित विजय गान ही गाये
तन का ओज न मिटने पाए॥२॥

अपनी दीन दशा पर रोती तड़पा करे दुराशा
सत्य धर्म की अमिट प्रभा में जागे नूतन आशा
मर कर जीवन रहे न जीवित मृतक कहीं कहलाए
मन की आन न झुकने पाये॥३॥

शूरों का तो खेल हु करता है मरना-जीना
जगती के मस्तक पर चमकें बन अनमोल नगीना
प्रिय स्वदेश पावन स्वधर्म-हित हम सर्वस्व लुटाएँ
मंगल दीप न बुझने पाये॥४॥

maṁgala dīpa na bujhane pāe |
prabala thapeṛe khākara ura kī lau tanika ḍiga jāe
patha se paga na kahī haṭa jāe ||

aṭṭahāsa kara uṭhe prabhañjana ghire pralaya kā gherā
bana dāvānala ghara meṁ chāyā ho ghanaghora adherā
patha praśasta karane taba nabha meṁ vidyutchavi laharāe
amṛta jyoti naghaṭane pāye ||1||

gire gāja yā mana meṁ paṛate hoṁ jalate aṁgāre
damana -cakra kā praṇa le dhāyeṁ sūraja cāda sitāre
kintu satya kā pathika akampita vijaya gāna hī gāye
tana kā oja na miṭane pāe ||2||

apanī dīna daśā para rotī taṛapā kare durāśā
satya dharma kī amiṭa prabhā meṁ jāge nūtana āśā
mara kara jīvana rahe na jīvita mṛtaka kahīṁ kahalāe
mana kī āna na jhukane pāye ||3||

śūroṁ kā to khela huā karatā hai maranā-jīnā
jagatī ke mastaka para camakeṁ bana anamola nagīnā
priya svadeśa pāvana svadharma-hita hama sarvasva luṭāe
maṁgala dīpa na bujhane pāye||4||

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मैं एक पत्नी होने के साथ साथ गृहिणी एवं माँ भी हुँ । लिखने का हुनर... ब्लॉग लिखती रहती हु... सनातन ग्रुप एक सकारात्मक ऊर्जा, आत्मनिर्भर बनाने की प्रेरणा देती जीवनी, राष्ट्रभक्ति गीत एवं कविताओं की माला पिरोया है । आग्रह :आपको पसन्द आये तो ऊर्जा देने के लिए शेयर एवं अपने सुझाव दीजिए ।

शालू सिंह

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