मातृ मन्दिर के पुजारी वन्दना किस विधि करें।
ध्येय प्रतिमा को ह्नदय में आज हम किस विधि धरें॥

धवल हिमालय भाल तेरा साधना का है बसेरा
मौन हो निज को गलाकर भूमि पर अमृत बिखेरा
बन ब्रह्मपुत्र और सिन्धु गंगा नर्मदा कावेरी माँ
वन्दना किस वधि करें॥

शस्य श्यामल वक्ष तेरा मौन सेवा का बसेरा
वत्सले तूने युगों से अन्न निज़ घर -घर बिखरा
लक्ष्मी रुपे अन्नपूर्णा अम्बिके तू प्यारी माँ॥
वन्दना किस विधि करें॥

सिंधु तेरे चरण छूकर कर रहा यशनाद तेरा
ऋषिजनों ने ज्ञान -रवि से धर्म किरणों को बिखेरा
ज्ञान की मन्दाकिनी तू शारदा का रुप माँ॥
वन्दना किस विधि करें

निशा बीती भोर आया मिट चले भ्रम के सितारे
श्क्ति का नव रुप लखकर दिशि दिशों के असुर काँपे
महाकाले शक्ति दुर्गे असुरमर्दिनी चण्डी माँ॥
वन्दना किस विधि करें।

श्वास तेरे तुझे अर्पित तन समर्पित मन समर्पित
चेतना ले दिव्य तेरी कोटि पग बढ़ चले पथ पर
ध्येय का साक्षात करने दिग्विजय कर तेरी माँ।
वन्दना किस विधि करें।

English Transliteration:
mātṛ mandira ke pujārī vandanā kisa vidhi kareṁ|
dhyeya pratimā ko hnadaya meṁ āja hama kisa vidhi dhareṁ||

dhavala himālaya bhāla terā sādhanā kā hai baserā
mauna ho nija ko galākara bhūmi para amṛta bikherā
bana brahmaputra aura sindhu gaṁgā narmadā kāverī mā
vandanā kisa vadhi kareṁ||

śasya śyāmala vakṣa terā mauna sevā kā baserā
vatsale tūne yugoṁ se anna niza ghara -ghara bikharā
lakṣmī rupe annapūrṇā ambike tū pyārī mā||
vandanā kisa vidhi kareṁ||

siṁdhu tere caraṇa chūkara kara rahā yaśanāda terā
ṛṣijanoṁ ne jñāna -ravi se dharma kiraṇoṁ ko bikherā
jñāna kī mandākinī tū śāradā kā rupa mā ||
vandanā kisa vidhi kareṁ

niśā bītī bhora āyā miṭa cale bhrama ke sitāre
śkti kā nava rupa lakhakara diśi diśoṁ ke asura kāpe
mahākāle śakti durge asuramardinī caṇḍī mā||
vandanā kisa vidhi kareṁ|

śvāsa tere tujhe arpita tana samarpita mana samarpita
cetanā le divya terī koṭi paga baṛha cale patha para
dhyeya kā sākṣāta karane digvijaya kara terī mā |
vandanā kisa vidhi kareṁ|

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मैं एक पत्नी होने के साथ साथ गृहिणी एवं माँ भी हुँ । लिखने का हुनर... ब्लॉग लिखती रहती हु... सनातन ग्रुप एक सकारात्मक ऊर्जा, आत्मनिर्भर बनाने की प्रेरणा देती जीवनी, राष्ट्रभक्ति गीत एवं कविताओं की माला पिरोया है । आग्रह :आपको पसन्द आये तो ऊर्जा देने के लिए शेयर एवं अपने सुझाव दीजिए ।

शालू सिंह

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